Kerala election 2026: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक नया विवाद सियासत का तापमान बढ़ा रहा है. SDPI के समर्थन को लेकर शुरू हुई बहस अब सीधे तौर पर LDF और कांग्रेस के बीच टकराव में बदल चुकी है. मुद्दा सिर्फ समर्थन का नहीं, बल्कि “सेक्युलर राजनीति” बनाम “गुप्त समझौते” के आरोपों का है, और यही इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है.
क्या है पूरा विवाद?विवाद तब शुरू हुआ जब SDPI ने कुछ सीटों पर सत्तारूढ़ LDF उम्मीदवारों को समर्थन देने के संकेत दिए, खासकर नेमोम जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर. इसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि CPI(M) और SDPI के बीच “अंदरखाने डील” है. हालांकि, वामपंथी खेमे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया, लेकिन एक लाइन बार-बार दोहराई- वोट किसी का भी हो, उसे ठुकराया नहीं जा सकता.
‘हम किसी का वोट मना नहीं कर सकते’LDF उम्मीदवार और वरिष्ठ CPI(M) नेता वी शिवनकुट्टी ने साफ कहा, “संविधान हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार देता है. एक उम्मीदवार के तौर पर मैं सिर्फ वोट मांग सकता हूं, यह नहीं कह सकता कि किसी खास समूह का वोट नहीं लूंगा. क्या ऐसा कहीं होता है?”
उन्होंने आगे जोड़ा, “यह कहना कि हम किसी वर्ग का वोट नहीं चाहते, असंवैधानिक है.” यानी CPI(M) का स्टैंड साफ है. कोई औपचारिक गठबंधन नहीं, लेकिन वोट आने से इनकार भी नहीं.
पूर्व वित्त मंत्री टीएम थॉमस आइजैक ने भी इसी लाइन को दोहराते हुए कहा, “हम किसी से बातचीत या समझौता नहीं करेंगे लेकिन जो वोट देगा, उसे मना भी नहीं करेंगे.”
कांग्रेस का पलटवार—‘सेक्युलर स्टैंड कहां है?’वहीं, कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मुद्दे को “सिद्धांत बनाम राजनीति” के रूप में पेश कर रहा है. विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने सवाल उठाया कि अगर LDF सच में सेक्युलर है, तो क्या वह SDPI के समर्थन को खुलकर ठुकराने का साहस दिखाएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि LDF एक तरफ UDF पर आरोप लगाता है, लेकिन दूसरी तरफ SDPI के साथ “चुपचाप बातचीत” भी करता है.
SDPI का बयान—‘हम रणनीति से सपोर्ट देंगे’इस पूरे विवाद के बीच SDPI ने भी अपना रुख साफ किया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी ने कहा, “जहां हम चुनाव नहीं लड़ रहे, वहां किसी एक फ्रंट—LDF या UDF—को समर्थन देंगे.” उन्होंने यह भी माना कि नेमोम में BJP मजबूत है, इसलिए वहां LDF को समर्थन दिया गया है. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा, “इसका मतलब यह नहीं कि हम हर जगह LDF को ही समर्थन देंगे.”
BJP की एंट्री, आरोप और तीखेइस विवाद में BJP भी कूद पड़ी है. BJP State prsident राजीव चंद्रशेखर ने वामपंथी नेताओं पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाया और इसे राजनीतिक पाखंड बताया. राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “एमए बेबी को अपना दिमाग दिखाना चाहिए. जब पहलगाम की घटना हुई, तो एमए बेबी ने पाकिस्तानी आतंकवादियों की निंदा करने के बजाय भारत सरकार को ही दोषी ठहराया. असली मुद्दा यह है कि कम्युनिस्ट पार्टी के मौजूदा मंत्री SDPI के वोट कैसे स्वीकार कर रहे हैं, जैसा कि शिवनकुट्टी जी ने किया. आज मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हम SDPI के वोट स्वीकार नहीं करते. यह दोहरे मानदंड और पाखंड को दिखाता है. एक कहावत है—चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में फर्क यह है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रवादी है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रविरोधी है. एमए बेबी और शिवनकुट्टी ने इसे साबित कर दिया है.”
क्यों अहम है यह विवाद?केरल की राजनीति पारंपरिक रूप से LDF बनाम UDF के बीच रही है, लेकिन BJP भी इस बार कुछ सीटों पर मजबूत चुनौती पेश कर रही है. ऐसे में SDPI जैसे संगठनों का समर्थन चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है, खासकर करीबी मुकाबलों में. 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है.
SDPI क्या है?सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) एक राजनीतिक दल है, जिसे आम तौर पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का राजनीतिक विंग माना जाता रहा है. PFI पर केंद्र सरकार ने 2022 में प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद SDPI की गतिविधियां और ज्यादा चर्चा में आईं. SDPI खुद को सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की आवाज बताती है. पार्टी कई राज्यों, खासकर केरल और कर्नाटक में सक्रिय है और चुनावों में उम्मीदवार भी उतारती है. हालांकि, इसके राजनीतिक रुख और कथित संबंधों को लेकर अक्सर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आते रहे हैं.
