केरल की सियासत में FCRA संशोधन को लेकर घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने पीएम के बयान को “पूरे समुदाय का अपमान” बताते हुए गहरी नाराज़गी जताई है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अप्रैल को केरल के तिरुवल्ला में एक NDA रैली के दौरान UDF पर FCRA और यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर “झूठ फैलाने” का आरोप लगाया. इसी बयान पर अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दा बना दिया है.

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“गहरे दुख और निराशा के साथ लिख रहा हूं...”केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने लिखा— “मैं आपको गहरे दुख और निराशा के साथ लिख रहा हूं. केरल में आपका बयान, जिसमें आपने UDF पर FCRA को लेकर राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया, बेहद समस्याग्रस्त और पूरे समुदाय के लिए अपमानजनक था. पवित्र दिन पर ऐसा बयान देना विशेष रूप से दुर्भाग्यपूर्ण और टाला जा सकने वाला था.”

वेणुगोपाल ने यह भी साफ किया कि FCRA में प्रस्तावित बदलावों के “दूरगामी और खतरनाक परिणाम” हैं, जिन्हें किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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सरकार का पक्ष-“ईमानदार NGOs को डरने की जरूरत नहीं”इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, “ईसाई समुदाय को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल अच्छे NGOs की मदद करेगा और केवल उन अवैध संगठनों को निशाना बनाएगा जो भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं. अच्छे संगठनों को कोई नुकसान नहीं होगा, खासकर ईसाई संगठनों को. मैं उन्हें पूरा आश्वासन देना चाहता हूं कि यह बिल वास्तविक संगठनों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.” उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल बिल को रोक दिया गया है और इस पर आगे चर्चा होगी.

खड़गे का हमला-“यह सुधार नहीं, हमला है”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा, “यह सुधार नहीं है. यह हमला है, सिर्फ ईसाई संस्थानों पर नहीं, बल्कि नागरिक समाज, NGOs और गरीबों की मदद करने वाली संस्थाओं पर भी.” खड़गे ने इसे “चुनिंदा टारगेटिंग” करार देते हुए कहा कि जैसे वक्फ कानून में बदलाव से मुस्लिम समुदाय में डर पैदा हुआ, वैसे ही FCRA संशोधन से ईसाई समुदाय में चिंता बढ़ी है.

चुनावी असर और सियासी संदेशकेरल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले FCRA का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है. कांग्रेस इसे समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों से जोड़कर बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है, वहीं भाजपा इसे पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश कर रही है. इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि FCRA संशोधन अब सिर्फ एक कानूनी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक विमर्श का केंद्र बन चुका है.