Karnataka Election Voting Live: कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. राज्य में किसी भी पार्टी को साधारण बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 113 सीटें जीतना अनिवार्य है. आज राज्य में इसके लिए मतदान किए जा रहे हैं. लोग सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुंच कर ईवीएम का बटन दबा रहे हैं ताकि वे अपना अगला पांच साल सुरक्षित कर सकें. राज्य के विकास के लिए अच्छे प्रत्याशियों को चुनकर किसी एक पार्टी के हाथ में कमान सौंपे. किसी भी राज्य में अगर किसी एक पार्टी को बहुमत हासिल होता है तो वहां फिर उसके लिए सरकार बनाने और चलाने में कोई दिक्कत नहीं आती है. हालांकि चुनाव के नतीजे आने के बाद कई बार कई अलग-अलग तरह की स्थिति बनती है. ऐसें में कर्नाटक चुनाव में तीन बड़े सवाल क्या हैं और उनके जवाब क्या हैं आइए जानते हैं.
- पहला सवाल- क्या कांग्रेस को अपने दम पर बहुमत हासिल होगा?- दूसरा यह कि क्या 1985 के बाद राज्य में कोई सरकार रिपीट कर पाएगी?- तीसरा सवाल यह कि हंग असेंबली होने की स्थिति में किसका गठबंधन बनेगा- बीजेपी और जेडीएस या फिर कांग्रेस और जेडीएस?
ये तीनों ही सवाल कर्नाटक की दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण हैं. अगर हम चुनाव पूर्व हुए सर्वेक्षणों के आधार पर कहें तो अनुमान है कि किसी भी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिलने की संभावना है. हां, लेकिन सभी सर्वेक्षणों में कांग्रेस को सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के रूप में उभरने अनुमान लगाया गया है. वहीं, भाजपा इस बार दूसरे नंबर पर रह सकती है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस को बहुमत भी हासिल हो सकता है.
वहीं, अगर दूसरे सवाल को देखें तो यह बड़ा ही दिलचस्प है. चूंकि कर्नाटक एक प्रॉस्पेरस स्टेट है और वहां कि लिटरेसी रेट भी हाई है. ऐसे में लोगों में चुनाव प्रक्रिया और विकास को लेकर एक समझ है. यही वजह है कि वहां पर हर पांच साल के बाद सत्तारूढ़ दल को सत्ता से बेदखल कर दिया जाता है. 1985 के बाद से अब तक के चुनावों में यही ट्रेंड रहा है.
अगर 2023 में भाजपा फिर से सत्ता में आती है तो यह 32 सालों के ट्रेंड को खत्म कर देगी.
तीसरे सवाल का जवाब मिल पाना अभी थोड़ा सा मुश्किल है लेकिन एक अनुमान के मुताबित अगर राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलती है तो ऐसी स्थिति को हम हंग असेंबली के नाम से जानते हैं. कर्नाटक के राजनीतिक परिदृष्य में तीन प्रमुख पार्टियां हैं. बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस. अगर हम गठबंधन की बात करें तो दो ही स्थितियां बनतीं है. पहला यह कि भाजपा और जेडी (एस) एक साथ आ सकते हैं और दूसरी परिस्थित में कांग्रेस और जेडी (एस) का गठबंधन हो सकता है. ये 2018 में हुआ भी है. एक बात यह भी है कि अगर हंग असेंबली की स्थिति बनती है और कांग्रेस बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाती है तो भाजपा हर संभव राज्य में जेडी (एस) के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करेगी. इन तीनों परिस्थियों में से कौन सी परिस्थित सामने आती है ये तो 13 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही पता चल पाएगा. 5.3 करोड़ से अधिक मतदाता डालेंगे वोट
राज्य भर के 58,545 मतदान केंद्रों पर कुल 5,31,33,054 मतदाता वोट डालेंगे. कर्नाटक की लड़ाई में प्रमुख राजनीतिक दलों में भाजपा, कांग्रेस और जद (एस) हैं. सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत का आंकड़ा 113 सीटों का है. कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची में लगभग 42.5 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं. 37,777 स्थानों पर बनाए गए 58,545 मतदान केंद्रों पर 5.3 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. मतदाता सूची में 11.7 लाख युवा मतदाता, 12.2 लाख वरिष्ठ नागरिक मतदाता जो 80 वर्ष या उससे अधिक हैं, और 5.7 लाख विकलांग व्यक्ति (PwD) वर्ग के मतदाता शामिल हैं. मतदान प्रक्रिया में लगभग 4 लाख मतदान कर्मी शामिल हैं.
