नई दिल्ली: हरियाणा में दिनों-दिन चुनावी पारा चढ़ता जा रहा है. मेवात यानी नूंह जिला हरियाणा का मुस्लिम बहुल इलाका है. यहां मेवों की आबादी करीब 70 फीसदी है. मेवात की तीन विधानसभा सीटों नूंह, फिरोजपुर झिरका और पुन्हाना में हार-जीत का फैसला मुस्लिम वोटर ही करते हैं. इस बार यहां बीजेपी की साख दांव पर लगी हुई है. यह इलाका बीजेपी के लिए बंजर रहा है. अब सियासी फसल उगाने के लिए बीजेपी ने कमर कस लिया है.

बीजेपी ने हरियाणा में 90 में से 75 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है और नूंह जिले की तीनों विधानसभा सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है. नूंह के नजदीक बसे गांव जयसिंहपुर का सियासी मिजाज समझिए. इसी गांव के पहलू खान को करीब दो साल पहले कुछ लोगों ने गो तस्करी के आरोप में पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था.

हमलावरों की भीड़ ने जब उसे राजस्थान के बहरोड़ में बेदर्दी से पीटा था, तब वो जयपुर से गायें खरीदकर लौट रहा था. हालांकि पिछले दिनों अलवर की अदालत ने आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. लेकिन पहलू खान की पत्नी का कहना है कि मरते दम तक लंबी अदालती लड़ाई लड़ने के लिए वे तैयार हैं. पहलु खान के बेटे मुबारक का कहना है कि गो तस्करी के शक में पिता की हत्या के बाद पूरे इलाके में खौफ का आलम है. उसी खौफ का नतीजा है कि अब गांव के मेवों ने गाय पालना बंद कर दिया है. गांव के अन्य लोगों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि पहलू खान की मौत के बाद हालात काफी बदल गए हैं.

कहा जाता है कि मेव मध्य एशिया से आए थे. ये मेद कहलाते थे. जो अपभ्रंश होकर मेव हो गया और इलाका मेवात कहलाया जाने लगा. पिछले विधानसभा चुनावों में पांच में से एक ही सीट बीजेपी को मिली थी. लोकसभा की सभी दस सीटों पर बीजेपी जीती, लेकिन मेवात में पिछड़ी थी. इस बार बीजेपी ने नई रणनीति अपनाई है.

बीजेपी ने नई रणनीति के तहत आईएनएलडी के एमएलए चौधरी जाकिर हुसैन समेत मेवात के कई बड़े नेताओं को चुनाव से ठीक पहले अपने पाले में कर लिया है. नूंह सीट से जीत का परचम लहराने के लिए जाकिर हुसैन के साथ-साथ फिरोजपुर झिरका से चौटाला की पार्टी के विधायक नसीम अहमद को टिकट दिया है. मतलब बीजेपी ने हरियाणा से दो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं.

हालांकि विपक्ष की तरफ से बीजेपी पर आरोप लगते रहे हैं कि मेवात में कभी गौरक्षा को मुद्दा बनाया जाता है तो कभी गोमांस के खिलाफ अभियान चलाया जाता है. और कभी सड़क पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ कारवाई करके हिन्दू कार्ड खेला जाता है लेकिन चुनाव आते ही इस बार ये सारे मुद्दे पीछे छूट गए हैं.

नीति आयोग का कहना है कि मेवात देश के सबसे पिछ़ड़े जिलों में आता है लेकिन ऐसे जिले जो संभावना वाले हैं, जहां विकास की संभावना है. ऐसे में सवाल उठता है कि कौन विकास में अंड़गा लगा रहा है? मेवात की गलियों और कूचों को बरसों से विकास का इंतजार है. चुनावी मौसम में हर पार्टी की तरफ से इस पूरे इलाके की तरक्की के दावे और वादे किए जा रहे हैं.

हरियाणा: मेवात में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई, देखिए पहलू खान के गांव नूंह में क्या है चुनावी माहौल? | Haryana Elections 2019