बिहार विधानसभा चुनाव के फाइनल नतीजे आने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं और गिनती के साथ ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है. दोपहर 12 बजे तक के रूझानों ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला एकतरफा होता दिख रहा है.

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दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, एनडीए 191 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो कि पूर्ण बहुमत से कहीं अधिक है. इसके मुकाबले महागठबंधन मात्र 48 सीटों पर आगे है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश करता है. वोटों की अंतिम गिनती भले बदल सकती है, लेकिन अंतर इतना बड़ा है कि इसका असर फाइनल नतीजों पर भी दिखने की पूरी संभावना है. 

महागठबंधन की बढ़ी चिंता

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महागठबंधन के लिए यह रुझान चिंता बढ़ाने वाला है. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाकर जोरदार कैंपेन किया था, लेकिन शुरुआती रुझानों से लगता है कि उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया. देखा जाए तो महागठबंधन की इस बार की सीटें 2020 के चुनाव से आधी हैं.

पिछले विधानसभा चुनाव में कैसा था रिजल्ट?

पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 पार करते हुए कुल 125 सीटें हासिल की थीं. बीजेपी को 74, जदयू को 43, वीआईपी को 4 और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को 4 सीटों पर जीत मिली थी.

इतनी सीटों पर सिमटा था महागठबंधन

वहीं, महागठबंधन ने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा और कुल 110 सीटें जीती थीं. इसमें आरजेडी ने 75, कांग्रेस ने 19, सीपीआई-माले ने 12, जबकि सीपीआई और सीपीएम ने 2-2 सीटें जीती थीं.

इनके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा 1 सीट पर जीत हासिल कर पाई थी. चिराग पासवान की लोजपा, जिसने पिछली बार एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था, सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही थी.

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