Bengal Assembly Election 2026: बंगाल चुनाव बीतने के तुरंत बाद आए एग्जिट पोल इस बात का इशारा कर रहे हैं कि अब ममता बनर्जी की बंगाल की सत्ता से विदाई तय है. पिछले 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी वामपंथ के 35 साल के बनाए गढ़ को ध्वस्त कर सत्ता में आई थीं. लेकिन भाजपा ने 15 साल में ही ममता की विदाई की पटकथा लिख दी है. लंबे शासन की एंटी इन्कम्बेंसी, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और बंगाल में लगातार हो रही हिंसाओं ने ममता बनर्जी की सरकार से लोगों का भरोसा हिला दिया है.

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वहीं पहले कांग्रेस और फिर लेफ्ट के कमजोर होने से खाली पड़े वैक्यूम को बीजेपी लगातार भरने की कोशिश कर रही थी और इस बार एग्जिट पोल के आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी उस कोशिश में कामयाब भी होती दिख रही है.

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ये एग्जिट पोल इस बात का भी इशारा हैं कि सत्ता के केंद्र में सिर्फ एक शख्स के जरिए राजनीति करना टीएमसी को भारी पड़ा है और इसका नुकसान पार्टी को इस चुनाव में उठाना पड़ा है. हालांकि टीएमसी के लिए ये चुनाव उतना भी कमजोर नहीं रहा है, क्योंकि तमाम एग्जिट पोल भले ही बीजेपी को बहुमत दिखा रहे हों, लेकिन टीएमसी भी बहुत कम सीटों से ही बीजेपी से पीछे है.

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अगर टीएमसी इस एग्जिट पोल से सबक ले सकती है तो उसके लिए एक सबक जरूर है कि सिर्फ मां-माटी और मानुष के नारे के जरिए ही सत्ता पर लंबे वक्त तक काबिज नहीं रहा जा सकता, बल्कि उसके लिए लॉ एंड ऑर्डर, रोजगार और जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी होता है.

आरजी कर रेप केस और संदेशखाली जैसे मुद्दों पर ममता सरकार की ढिलाई ने लोगों को आक्रोशित किया, कोयला घोटाले में ममता बनर्जी का पॉलिटिकल कैंपेन संभालने वाली आईपैक के फंसने और उसे बचाने के लिए ममता बनर्जी का खुद आईपैक के दफ्तर जाने का मुद्दा न सिर्फ अदालत में बैकफायर कर गया, बल्कि जनता के बीच भी ममता की छवि नकारात्मक बनी. इन सबका नतीजा एग्जिट पोल के आंकड़ों में छिपा हुआ है.