कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को ‘बांग्ला पोक्खो’ के नेता गार्गा चटर्जी को हाल में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बारे में गलत सूचना फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.

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अधिकारियों ने बताया कि चटर्जी को कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने तब गिरफ्तार किया जब उन्होंने चुनाव अवधि के दौरान अपनी पोस्ट को लेकर दर्ज शिकायतों के संबंध में जारी किए गए दो समन को कथित तौर पर नजरअंदाज किया.

पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई चुनाव अधिकारियों की शिकायतों के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चटर्जी के पोस्ट भ्रामक जानकारी फैलाकर और मतदान प्रक्रिया में अविश्वास पैदा करते हैं.

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कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने लालबाजार में पत्रकारों को बताया, ‘‘उनके खिलाफ शिकायत कोलकाता उत्तर के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) ने दर्ज कराई थी जिसके बाद साइबर प्रकोष्ठ ने कार्रवाई शुरू की. उन्हें इस मामले में दो बार तलब किया गया था लेकिन वह पेश नहीं हुए और इसी वजह से उन्हें आज गिरफ्तार किया गया’’.

नंद ने कहा कि पुलिस ने चटर्जी द्वारा कथित तौर पर विभिन्न समुदायों को निशाना बनाने और विभाजनकारी विचारों को बढ़ावा देने वाली कई सोशल मीडिया पोस्ट का भी संज्ञान लिया है.

आयुक्त ने कहा, 'पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए भी कार्रवाई की है. उन्होंने बार-बार सोशल मीडिया पर विभिन्न समुदायों से संबंधित सामग्री पोस्ट की. इन पोस्ट में विभाजनकारी भावनाएं थीं और इससे संबंधित शिकायतें भी दर्ज की जा रही हैं'. सूत्रों के मुताबिक, चटर्जी को बुधवार को अदालत में पेश किया जा सकता है और पुलिस पूछताछ के लिए उनकी हिरासत मांग सकती है.

यह गिरफ्तारी चटर्जी द्वारा चुनाव प्रचार और मतदान के चरणों के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक टिप्पणियों के माध्यम से बार-बार ईवीएम के कामकाज और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने के कुछ हफ्तों बाद हुई है.

विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण माहौल के मद्देनजर यह गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है. ‘बांग्ला पोक्खो’ बांग्ला हितों का पैरोकार संगठन है.