नई दिल्ली: आज के चुनाव परिणाम में कांग्रेस में हुड्डा परिवार का भविष्य छुपा हुआ है. चुनाव से ऐन वक्त पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कांग्रेस ने कमान सौंपी. इसके बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने पहले पार्टी छोड़ी और फिर जेजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया. पहले आज के चुनाव परिणाम को समझिए. हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को मुश्किल में डाल दिया है. चुनाव के पहले तक जो बीजेपी ये दावे कर रही थी कि उसे आसानी से बहुमत मिल जाएगा ऐसा हो नहीं पाया. कांग्रेस के अलावा दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी ने खेल कर दिया और बीजेपी की राह मुश्किल हो गई.
मतलब जिस कांग्रेस को लड़ाई से दूर समझा जा रहा था वह ना सिर्फ कांटें की टक्कर दे रही है बल्कि सूबे की सत्ता के शिखर पर पहुंचने के आंकड़ों की व्यवस्था में जुटी हुई है. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने विपक्ष की पार्टियों से कांग्रेस से हाथ मिलाने की अपील की. हुड्डा ने कहा, ''यह जनादेश बीजेपी के खिलाफ है. बीजेपी को दूर रखने के लिए जेजेपी, आईएनएलडी, निर्दलीय सहित अन्य को कांग्रेस से हाथ मिलाना चाहिए.''
राहुल गांधी की नाराजगी के बावजूद हुड्डा दमदार बनकर उभरे यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस ने जेजीपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की है, उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है. हुड्डा ने कहा, ''हम मजबूत सरकार बनाने के लिए तैयार हैं.'' अब ध्यान देने वाली बात यह है कि अक्सर यह चर्चा होती रही कि राहुल गांधी हुड्डा से नाराज हैं. पूरे चुनाव के दौरान हुड्डा और राहुल गांधी एक साथ कैंपेन करते भी नहीं दिखे. हरियाणा में कांग्रेस के बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद पार्टी को बड़ा झटका लगा है. कैथल से विधायक और पार्टी के नेशनल मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरेजवाला अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं. कड़े मुकाबले में इनेलो से पूर्व विधायक रह चुके मौजूदा बीजेपी प्रत्याशी लीला राम ने उन्हें हराया है. अब इस तरह हुड्डा के सामने सुरजेवाला गुट भी दबाव में रहेगा. तंवर का गुट पहले ही पार्टी में किनारे लगा दिया गया. तंवर ने पार्टी भी छोड़ दी. इस तरह हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में दमदार क्षेत्रीय छत्रप के रूप में उभर चुके हैं.
कभी उप प्रधानमंत्री को दी थी मात राज्य की राजनीति में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पार्टी के कद्दावर नेता के रूप में मैदान में बने हुए हैं. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस हाईकामन ने हुड्डा के बागी तेवरों को देखते हुए ना सिर्फ उन्हें नेता विपक्ष की कमान दी, बल्कि उनकी मांग को मानकर अशोक तंवर को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. राज्य कांग्रेस का सबसे बड़े चेहरा बनने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राजनीति में 30 साल से लंबा सफर तय किया है.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्म साल 1947 में रोहतक जिले के सांघी गांव में हुआ था. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही कांग्रेस के नेता भी थे. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 25 साल की उम्र में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से ही की. यूथ कांग्रेस में कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद 1991 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रोहतक से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया. भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल को चुनाव में मात देकर पहली बार लोकसभा में पहुंचे. इतना नहीं नहीं 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में भी हुड्डा ने देवीलाल को मात दी.
2005 में बने सीएम 1996 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान दी गई. 2001 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहली बार राज्य में नेता विपक्ष बने. 2004 में एक बार फिर भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा लोकसभा के सदस्य चुने गए. 2005 में कांग्रेस को हरियाणा विधानसभा चुनाव में 67 सीटों पर जीत मिली. ऐसा माना जा रहा था कि भजनलाल राज्य के सीएम बनेंगे, लेकिन कांग्रेस ने सबको चौंकाते हुए भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा को सीएम बनाया. 2009 के लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली. इसके बाद दूसरी बार हु्ड्डा को राज्य का सीएम बनाया गया.
2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 15 सीटें मिली और इंडियन नेशनल लोकदल राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल करने में कामयाब रही. इतना ही नहीं कांग्रेस ने भी हुड्डा की बात ना मानते हुए राज्य में पार्टी की कमान अशोक तंवर के हाथों दे दी. 2019 के लोकसभा चुनाव में हुड्डा को सोनीपत लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा. कुछ वक्त पहले हुड्डा ने बागी तेवर अख्तियार कर लिए थे, जिसके बाद कांग्रेस हाईकमान उनके सामने झुक गया. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इलेक्शन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है और वह इस वक्त राज्य में सबसे बड़ा जाट चेहरा भी हैं.
