बांग्लादेश से सटीं असम की 50 विधानसभा सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं. यहां हर बार कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है. इस बार भी सबकी खास नजर है, जिसकी असली वजह ये है कि  AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. AIUDF ने इस बार सिर्फ 27 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे हैं. अब देखना ये है कि दोनों पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने का किसको फायदा और किसको नुकसान होने वाला है.

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फिलहाल AIUDF चीफ मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल बन्नाकंडी विधानसभा सीट पर लीड कर रहे हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव में इन 50 सीटों में से 23 पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी, जबकि 27 पर कांग्रेस और AIUDF गठबंधन जीता था. इन सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक की अहम भूमिका देखने को मिलती है. 

बिन्नाकांडी सीट पर बदरुद्दीन अजमल के अलावा, असम गण परिषद के साहाबुद्दीन मजूमदार और असम जातीय परिषद के रेजाउल करीम चौधरी के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. 10 बजे तक 3,681 वोटों के साथ रेजाउल चौधरी आगे चल रहे थे, जबकि 3,650 वीटों के साथ मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल बेहद करीब थे. वहीं, 1,117 वोटों के साथ शाहाबउद्दीन मजूमदार तीसरे नंबर पर थे. अभी भी वह तीसरे नंबर पर ही हैं. 

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बदरुद्दीन ने साल 2005 में AIUDF पार्टी बनाई थी. उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की आवाज के रूप में बनाई और 2009 से 2024 तक धुबरी से सांसद रहे. AIUDF ने 2006 में असम की 10 सीटें जीतें, 2011 में 18, 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बदरुद्दीन अजमल हार गए. अब यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. 

असम की सभी 126 विधानसभा सीटों की बात करें तो सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 87 सीट पर आगे है, जबकि कांग्रेस 21 सीट पर बढ़त बनाए हुए है. निर्वाचन आयोग ने राज्य की 126 सीट में से 114 सीटों के रुझान जारी किए हैं, जिनमें बीजेपी 71 सीट पर आगे है, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट क्रमशः सात और नौ सीट पर आगे हैं. इसके अनुसार कांग्रेस 21 सीट पर आगे है, जबकि उसकी सहयोगी असम जातीय परिषद और रायजोर दल एक-एक सीट पर आगे हैं.