चंडीगढ़: देशभर में पांव पसारने में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) को पंजाब में बड़ा झटका लगता दिख रहा है. सूबे के जैतो से विधायक मास्टर बलदेव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आप प्रमुख केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा, ''पार्टी में आने का मकसद पंजाब के लोगों की भलाई करना था, लेकिन पार्टी अपनी विचारधारा से भटक गई है.''

पिछले करीब 15 दिनों में तीसरे नेता हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी को अलविदा कहा है. बलदेव से पहले सुखपाल सिंह खैरा और एसएस फुल्का ने इस्तीफा दिया था. खैरा ने पंजाबी एकता पार्टी का गठन किया है.

इस मौके पर आप के छह विधायक कंवर संधू, नजर सिंह मनशाहिया, मास्टर बलदेव, पीरमल सिंह, जगदेव कमालु और जग्गा इस्सोवाल मौजूद थे. साफ है कि ये विधायक भी आने वाले दिनों में इस्तीफा दे सकते हैं. पार्टी की लॉन्चिंग के मौके पर सुखपाल सिंह खैरा ने कहा था कि नई पार्टी कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और आम आदमी पार्टी से लड़ेगी.

आम आदमी पार्टी पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में चुनाव लड़ी थी. पार्टी ने ड्रग्स और अपराध को मुद्दा बनाया था. तब आप को 13 में से चार पर सफलता मिली थी. हालांकि दो सांसद बाद में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल से नाराजगी जताई. दोनों सांसद अल-थलग पड़ गए.

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पार्टी ने लोकसभा चुनाव के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाया. इस चुनाव में आप को 117 में से 20 सीटें मिली. मगर कुछ ही दिनों में पार्टी आंतरिक झगड़ों की शिकार बन गई. एक के बाद एक विधायकों और नेताओं ने इस्तीफा देना शुरु कर दिया. गठबंधन सहयोगियों ने भी नाता तोड़ लिया. इनमें अमन अरोड़ा जैसे नेता भी शामिल हैं. बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस ने भी अपना समर्थन वापस ले लिया.