नई दिल्ली: ऑनलाइन गेम्स से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इसका एक उदाहरण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में देखने को मिला. दरअसल कार्यक्रम में एक छात्र की मां ने बताया कि ऑनलाइन गेम्स खेलने की वजह से उनके बच्चे की पढ़ाई प्रभावति हो रही है. महिला ने बच्चे की पढ़ाई को लेकर पीएम मोदी से सलाह मांगी थी. बच्चे की मां को जवाब देते हुए पीएम मोदी ने पूछा- ‘ये PUBG वाला है क्या?’

महिला ने पीएम मोदी से क्या पूछा था?

मधुमिता सेन गुप्ता नाम की इस महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा, ‘’मेरा बेटा कक्षा 9वीं का छात्र है. पहले मेरा बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा था. टीचर्स भी उसको पसंद करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से ऑनलाइन गेम्स की तरफ उसका झूकाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. जिसके कारण उसकी पढ़ाई पर फर्क पड़ रहा है. मैंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन लगता है मैं असफल हूं. कृप्या मेरा मार्गदर्शन कीजिए कि मैं इस स्थिति को कैसे संभालूं?

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पीएम मोदी ने क्या जवाब दिया था?

महिला के सवाल करने के बाद पीएम मोदी ने पूछा, ‘’ ये PUBG वाला है क्या?’ पीएम मोदी के ये कहने के बाद कार्यक्रम में मौजूद सभी छात्र और उनके अभिभावक जो से हंसने लगते हैं और तालियां बजाने लगते हैं. इस दौरान पीएम मोदी कहते हैं, ‘’इस समस्या का समाधान भी है. हम ये चाहें कि हमारे बच्चे तकनीक से दूर चले जाएं, फिर तो वे एक प्रकार से पीछे की तरफ जाना शुरू हो जाएंगे. इसलिए हमें बच्चों को तकनीक की तरफ जाने के लिए बढ़ावा देना चाहिए. लेकिन यह तकनीक उसे रोबोट बना रही है या इंसान बना रही है, यह देखना जरूरी है.''

एक-आध परीक्षा में इधर-उधर होने से जिंदगी नहीं ठहरती-मोदी

इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बच्चों और उनके अभिभावकों से कहा, ‘’एक-आध परीक्षा में कुछ इधर-उधर हो जाए तो जिंदगी ठहर नहीं जाती, जिंदगी में हर पल कसौटी जरूरी है, ऐसे में कसौटी के तराजू पर नहीं झोंकने पर जिंदगी में ठहराव आ जायेगा. ज़िन्दगी का मतलब ही होता है गति, ज़िन्दगी का मतलब ही होता है सपने. ठहराव जिंदगी नहीं है.’’

पीएम मोदी ने कहा, ‘’एक कविता में लिखा है कि, ‘कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता है.' इसमें सबके लिए बहुत बड़ा संदेश छुपा है.’’ उन्होंने कहा, ‘’अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के अवसाद को हल्के में नहीं लेना चाहिए. अवसाद या तनाव से बचने के लिए काउंसलिंग से भी संकोच नहीं करना चाहिए, बच्चों के साथ सही तरह से बात करने वाले विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए.’’

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