जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस एक बार फिर सुर्खियों में है. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के फैसले ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन को, बल्कि छात्रों और शिक्षकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है. जिस मेडिकल कॉलेज को कुछ महीने पहले ही एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति मिली थी, उसी अनुमति को अब अचानक वापस ले लिया गया है. इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति दी गई थी. यह कॉलेज का पहला बैच था, जिसमें कुल 50 छात्रों ने दाखिला लिया. छात्रों ने नीट परीक्षा के आधार पर प्रवेश लिया था और पढ़ाई भी शुरू हो चुकी थी. अचानक अनुमति वापस लेने का फैसला कॉलेज के लिए बड़ा झटका साबित हुआ.
दाखिले को लेकर शुरू हुआ विवाद
कॉलेज में दाखिले के बाद से ही कुछ संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था. पहली एमबीबीएस बैच में शामिल 50 छात्रों में से 44 छात्र मुस्लिम समुदाय से थे. इसे लेकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने आपत्ति जताई. समिति का कहना था कि यह कॉलेज माता वैष्णो देवी मंदिर की दान राशि से बना है, इसलिए यहां कश्मीर के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए. इसी मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए गए.
अचानक हुआ निरीक्षण, उठे सवाल
2 जनवरी को NMC की टीम ने कॉलेज का अचानक निरीक्षण किया. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि निरीक्षण से सिर्फ 15 मिनट पहले फोन कर सूचना दी गई थी. उस समय सर्दियों की छुट्टियां चल रही थीं और कई शिक्षक छुट्टी पर थे. इसके बावजूद कॉलेज ने जांच टीम को पूरा सहयोग दिया. अधिकारियों का आरोप है कि टीम का रवैया पहले से तय था और जांच औपचारिकता जैसी लगी.
NMC ने गिनाईं कई कमियां
निरीक्षण के बाद NMC ने कॉलेज की अनुमति वापस ले ली. आयोग ने कहा कि कॉलेज में तय मानकों के अनुसार ढांचा और स्टाफ नहीं है. रिपोर्ट में बताया गया कि शिक्षकों की संख्या में करीब 39 प्रतिशत की कमी है. ट्यूटर और सीनियर रेजिडेंट की कमी 65 प्रतिशत बताई गई. इसके अलावा OPD में मरीजों की संख्या कम, बेड भरने की दर 45 प्रतिशत और ICU बेड की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई गई.
कॉलेज प्रशासन ने किया आरोपों से इनकार
कॉलेज के अधिकारियों और शिक्षकों ने NMC की रिपोर्ट को गलत बताया है. उनका कहना है कि रिपोर्ट में कई तथ्य सही नहीं हैं. उदाहरण के तौर पर लाइब्रेरी में किताबों की संख्या सिर्फ 75 बताई गई, जबकि असल में 2,700 से ज्यादा किताबें मौजूद हैं. जर्नल्स की संख्या भी सैकड़ों में है. इसी तरह ऑपरेशन थिएटर की संख्या दो बताई गई, जबकि कॉलेज में आठ ऑपरेशन थिएटर हैं.
मरीजों की संख्या पर भी विवाद
कॉलेज का दावा है कि निरीक्षण वाले दिन OPD में 400 से ज्यादा मरीज आए थे, लेकिन रिपोर्ट में यह संख्या काफी कम दिखाई गई. बेड की भराव दर और डिलीवरी के मामलों को भी गलत तरीके से पेश किया गया. कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि नए साल के आसपास मरीजों की संख्या वैसे भी कम हो जाती है, जिसे नजरअंदाज किया गया.
शिक्षकों और स्टाफ में नाराजगी
कॉलेज के कई डॉक्टर और कर्मचारी इस फैसले से बेहद निराश हैं. उनका कहना है कि उन्होंने बेहतर अवसर छोड़कर इस नए संस्थान को मजबूत बनाने का फैसला किया था. अब अचानक अनुमति रद्द होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है. कई शिक्षकों ने कहा कि इस फैसले में उनकी मेहनत और योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. यह भी पढ़ें - UPSC Success Story: पकौड़ों की ठेली से IAS तक, पिता के पसीने और बेटी के सपनों ने लिखी सफलता की कहानी
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