यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि उस परवरिश, धैर्य और सही तैयारी की है, जो किसी साधारण परिवार के बच्चे को असाधारण सफलता तक पहुंचा देती है. यूपी के फतेहपुर जिले के नगर पंचायत बहुवा के रहने वाले शिवम शिवहरे ने यूपीएससी की तरफ से आयोजित भारतीय सूचना सेवा (IIS) पास की.

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शिवम की सफलता की खबर जैसे ही सामने आई, परिवार से लेकर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई. वह खुद मानते हैं कि अगर बचपन से उन्हें घर में सही माहौल, समझ और हौसला न मिला होता, तो यह सफर इतना आसान नहीं होता. शिवम की परवरिश में उनकी मां सुशीला शिवहरे की भूमिका सबसे अहम रही. मां ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी, भले ही संसाधन सीमित रहे हों. शिवम बताते हैं कि मां ने कभी यह नहीं कहा कि हालात मुश्किल हैं, बल्कि हमेशा यही सिखाया कि मेहनत से रास्ता निकलता है.

शिवम बताते हैं कि उनके पिता रामाशंकर शिवहरे ने अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया. समय पर काम करना, मेहनत से भागना नहीं और खुद पर विश्वास रखना ये बातें उनके जीवन का हिस्सा बन गईं. यही वजह रही कि आगे चलकर नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी वे अपने लक्ष्य से नहीं भटके. उनकी इस कामयाबी में उनकी पत्नी डॉ. विजय लक्ष्मी शिवहरे और बेटे ओजस का भी योगदान है.

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कहां से की है पढ़ाई-लिखाई?

शिवम की पढ़ाई की शुरुआत फतेहपुर के ही बहुवा इंटर कॉलेज से हुई, जहां से उन्होंने हाईस्कूल पास किया. इसके बाद कानपुर के शिवाजी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया. पढ़ाई के दौरान माता-पिता ने कभी अंकों का दबाव नहीं बनाया, बल्कि सीखने पर ध्यान दिया. यह तरीका आज के माता-पिता के लिए एक अहम सीख है कि बच्चों की तुलना दूसरों से करने के बजाय उनकी रुचि और क्षमता को समझा जाए.

हायर एजुकेशन के लिए वह इंदौर गए और वहां के एक कॉलेज से बीटेक किया. इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई भी की. शिवम बताते हैं कि पढ़ाई के इस पूरे दौर में मां हमेशा उनका मनोबल बढ़ाती रहीं और पिता हर फैसले में साथ खड़े रहे.

कैसे करें तैयारी?

साल 2015 में शिवम ने प्रसार भारती ज्वाइन किया. नौकरी के साथ इस तैयारी आसान नहीं थी. शिवम बताते हैं कि अगर आपका टाइम मैनेजमेंट अच्छा है तो आप किसी भी एग्जाम की तैयारी कर सकते हैं. हर दिन थोड़ा-थोड़ा पढ़ना, छुट्टी के दिन रिवीजन करना और बिना तनाव के लगातार प्रयास करते रहना उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत रही. उन्होंने कार्य के बाद सीमित समय में नियमित अध्ययन कर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास जारी रखा और सफलता पाई.

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