अलवर की एक शांत गली से निकला एक सपना, पूरे देश में मिसाल बन गया. यह कहानी है लघिमा तिवारी की है. जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ अपने भरोसे और मेहनत के दम पर यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 19 हासिल कर ली.

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UPSC को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा का सपना देखते हैं, लेकिन मंज़िल तक बहुत कम पहुंच पाते हैं. ऐसे में लघिमा की कहानी उन सभी के लिए उम्मीद की रोशनी है, जो सीमित साधनों में बड़े सपने देखते हैं.

लघिमा ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई Delhi Technological University से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में पूरी की. साल 2021 में डिग्री हाथ में आई, तो सामने कई रास्ते थे. जिनमें नौकरी, आगे की पढ़ाई या फिर कुछ अलग करने का सपना था. लेकिन उन्होंने UPSC का रास्ता चुना. घर में माहौल सामान्य था, कोई बड़ी तैयारी की व्यवस्था नहीं, न कोचिंग का सहारा. लेकिन मन में साफ इरादा था. उन्होंने तय किया कि तैयारी खुद करेंगी, अपनी रफ्तार से करेंगी, और हार नहीं मानेंगी.

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कैसे की तैयारी?

तैयारी के दिनों में उनका कमरा ही दुनिया बन गया. किताबें, नोट्स, अखबार, और एक डायरी यही उनके साथी थे. उन्होंने बताया कि वे यूट्यूब पर UPSC टॉपर्स के इंटरव्यू देखती थीं. उन बातों से उन्हें दिशा मिली कैसे पढ़ना है, क्या पढ़ना है और कब दोहराना है. लघिमा ने किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया. उन्होंने सेल्फ स्टडी और टेस्ट सीरीज को अपना हथियार बनाया. नियमित मॉक टेस्ट दिए, अपनी गलतियों को नोट किया और उन्हें सुधारा. यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

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क्या दी सलाह?

वे मानती हैं कि UPSC की तैयारी में रोज 10-12 घंटे पढ़ना जरूरी नहीं, जरूरी है रोज पढ़ना. चाहे 5 घंटे पढ़ें, लेकिन हर दिन पढ़ें. उन्होंने अपनी पढ़ाई में निरंतरता रखी. यही आदत उन्हें मंजिल तक ले गई. प्रीलिम्स के बाद उन्होंने एक पल भी बर्बाद नहीं किया. तुरंत मेंस की तैयारी में जुट गईं. उनका कहना है कि मेंस परीक्षा गहराई मांगती है, इसलिए समय का सही उपयोग बहुत जरूरी है.

मिली थी यह रैंक

करीब एक साल तक उन्होंने पूरी लगन से पढ़ाई की. न घूमना, न त्योहार, न छुट्टी. सिर्फ एक लक्ष्य UPSC पास करना और जब रिजल्ट आया, तो वह पल सिर्फ उनके लिए नहीं, पूरे परिवार के लिए भावुक कर देने वाला था. स्क्रीन पर रैंक 19 देखकर घर में खुशी के आंसू बह निकले.

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