संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है. इस परीक्षा में इस बार कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है. जहां अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान प्राप्त किया वहीं भोपालगढ़ की अनीता देवड़ा की सफलता एक मां के त्याग और मेहनत की कहानी है.खेतों में मजदूरी कर मां ने पैसा जोड़कर बेटी को पढ़ाया और आज अनीता ने  UPSC में 644वीं रैंक ला कर मां का सपना पूरा किया.

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राजस्थान के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र की बेटी अनीता देवड़ा ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश की है.आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 644वीं रैंक हासिल कर सपना साकार कर लिया. उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है.

साधारण किसान परिवार से है ताल्लुक 

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अनीता देवड़ा जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र की रहने वाली हैं. उनके पिता श्यामलाल देवड़ा किसान हैं और परिवार एक साधारण कृषि पृष्ठभूमि से आता है. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा अनीता की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

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स्कूल में ही दिख गई थी प्रतिभा

अनीता ने अपनी स्कूली शिक्षा भोपालगढ़ के सैनी स्कूल से पूरी की. पढ़ाई में शुरू से ही होनहार अनीता ने 12वीं कक्षा में ब्लॉक स्तर पर टॉप किया था. इसी उपलब्धि के बाद उन्होंने अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य तय किया और प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा.

मां की मेहनत बनी सबसे बड़ी प्रेरणा

अनीता की सफलता के पीछे उनकी मां की मेहनत और त्याग सबसे बड़ी ताकत रही. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए उनकी मां खेतों में मजदूरी करती थीं. वे अपनी मेहनत की कमाई से पैसे बचाकर बेटी की पढ़ाई पर खर्च करती थीं.मां का संघर्ष और भरोसा ही अनीता के लिए प्रेरणा बन गया और उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत जारी रखी.

दिल्ली जाकर की UPSC की तैयारी

12वीं कक्षा में टॉप करने के बाद अनीता ने तय कर लिया था कि उन्हें IAS बनना है. इसके लिए उन्होंने उच्च शिक्षा और UPSC की तैयारी करने के लिए दिल्ली का रुख किया. वहां रहकर उन्होंने लगातार मेहनत, लगन और अनुशासन के साथ पढ़ाई की और आखिरकार सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.अनीता देवड़ा की इस सफलता से केवल उनका परिवार ही नहीं बल्कि पूरा भोपालगढ़ क्षेत्र और जोधपुर जिला गर्व महसूस कर रहा है.लोगों का कहना है कि अनीता की मेहनत और उनकी मां के संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी कठिन परिस्थिति को पार कर सफलता हासिल की जा सकती है. यह भी पढ़ें - कैसे शुरू करें UPSC CSE 2026 की तैयारी, क्या कहते हैं टॉपर्स और एक्सपर्ट्स?


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