Sardar Vallabhbhai Patel: हमारे देश को आजाद कराने में कई स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान रहा है. इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में सरदार वल्लभभाई पटेल भी एक थे. सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को आजाद करने में अहम भूमिका निभाई थी. भारत के आजाद होने के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी बने थे. बताया जाता है कि इतने बड़े पद पर रहकर भी सरदार वल्लभभाई पटेल बहुत सादगी भरा जीवन जीते थे. सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर कई किस्से भी मशहूर हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले गृहमंत्री थे, लेकिन उन्हें कितनी सैलरी मिलती थी. 

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सरदार वल्लभभाई पटेल को कितनी मिलती थी सैलरी? 

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जाता है कि देश की एकता के लिए ऐतिहासिक काम करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को अप्रैल 1948 में रोजाना करीब 45 रुपये सैलरी मिलती थी. सरदार वल्लभभाई पटेल को यह सैलरी देश के बड़े पद पर रहते हुए मिलती थी. वहीं यह सैलरी आज के समय में बहुत मामूली है. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रतिदिन जो 45 रुपये मिलते थे यह दो भत्तों को मिलाकर तय किया जाता था. वहीं सरदार पटेल की इस सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगता था.

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लौह पुरुष ने निभाई स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका 

सरदार पटेल को देश के लौह पुरुष के रूप में जाना जाता है. उन्होंने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, बल्कि आजादी के बाद भारत को एकजुट रखने में सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाई थी. वहीं सरदार पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे, उन्होंने संगठन को मजबूत करने और लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का काम भी किया. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनका भाषण लोगों में जोश भरने वाला था. देश आजाद होने के बाद की स्थितियां भी बहुत अलग थी, एक तरफ जहां विभाजन का दर्द था तो दूसरी ओर शरणार्थियों का संकट और सैकड़ों रियासतों का भारत में विलय बाकी था. ऐसे में सरदार पटेल को देश का पहला उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनाया गया. वहीं उन्होंने पंजाब और दिल्ली में राहत कार्यों की निगरानी की और दंगों के बीच शांति बहाल करने की कोशिश की. 

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565 रियासतों को भारत में मिलने का श्रेय 

आजादी के समय भारत में 565 से ज्यादा रियासतें थी. इन रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना आसान नहीं था. सरदार पटेल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन के साथ मिलकर ज्यादातर रियासतों को भारत में शामिल कराया. वहीं हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसे मामलों को उन्होंने शक्ति और राजनीतिक समझदारी से संभाला. हैदराबाद में पुलिस एक्शन चलकर निजाम शासन को भारतीय संघ में शामिल किया. वहीं जूनागढ़ का जनमत के आधार पर भारत में विलय कराया. इसी वजह से उन्हें आयरन मैन ऑफ इंडिया और एक भारत के शिल्पी के रूप में याद किया जाता है.

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