Russia Intelligence Agency : दुनिया की सबसे शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों की बात होती है तो रूस की KGB का नाम सबसे ऊपर आता है. यह एजेंसी सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश की सुरक्षा, राजनीति और वैश्विक रणनीति में भी इसकी बड़ी भूमिका थी. शीत युद्ध के समय KGB ने कई बड़े ऑपरेशन किए, जिनकी चर्चा आज भी होती है. खास बात यह है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी कभी इसी एजेंसी के लिए काम कर चुके हैं.
लोग KGB का नाम तो जानते हैं, पर इसके काम, इतिहास और भर्ती प्रक्रिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि रूस की खुफिया एजेंसी KGB स्पाई एजेंट्स को कैसे भर्ती करती है.
KGB क्या है?
KGB का पूरा नाम कोमिटेट गोसुडारस्टवेनॉय बेजोपास्नोस्टी है, जिसका मतलब होता राज्य सुरक्षा समिति है. यह सोवियत संघ की मुख्य खुफिया और सुरक्षा एजेंसी थी. इसका मुख्यालय मॉस्को के लुब्यंका स्क्वायर में स्थित था, जो आज भी रूस की सुरक्षा एजेंसी का केंद्र है,
KGB की शुरुआत कैसे हुई?
KGB की स्थापना साल 1954 में हुई थी. यह उस समय बनाई गई जब सोवियत संघ को एक मजबूत खुफिया एजेंसी की जरूरत थी. इसका काम देश को बाहरी और अंदरूनी खतरों से बचाना था. इसे कम्युनिस्ट सरकार की तलवार और ढाल भी कहा जाता था. KGB से पहले NKGB नाम की एजेंसी काम करती थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान काफी सक्रिय थी. उस समय सोवियत जासूस इतने मजबूत थे कि वे अपने सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियों की जानकारी भी हासिल कर लेते थे. वहीं शीत युद्ध के दौरान KGB अपने चरम पर थी. उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव काफी ज्यादा था. KGB ने कई देशों में जासूसी नेटवर्क फैलाया और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई. हालांकि अमेरिका में इसे काम करने में मुश्किलें आईं क्योंकि वहां रेड स्केयर के दौरान कम्युनिस्टों के खिलाफ सख्त जांच चल रही थी.
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कब पुतिन भी थे इसमें जासूस?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1975 से 1991 तक KGB में काम किया है. वे एक विदेशी खुफिया अधिकारी थे और कई गुप्त मिशनों का हिस्सा रहे. हालांकि KGB को 3 दिसंबर 1991 को भंग कर दिया गया, जब सोवियत संघ टूट गया. इसके बाद रूस में नई एजेंसी FSB बनाई गई, जो आज देश की मुख्य सुरक्षा एजेंसी है और KGB की तरह ही काम करती है.
रूस की खुफिया एजेंसी KGB स्पाई एजेंट्स को कैसे भर्ती करती है
KGB में भर्ती होना आसान नहीं था. इसके लिए कड़े नियम और जांच प्रक्रिया होती थी. इसमें सिर्फ रूसी नागरिक ही इसमें शामिल हो सकते थे. उम्मीदवार की उम्र आमतौर पर 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए. उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं होना चाहिए. दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों को अनुमति नहीं थी. जिनके करीबी रिश्तेदार विदेश में रहते हो या विदेश में संपत्ति हो, उन्हें भी शामिल नहीं किया जाता था. इसके अलावा उम्मीदवार की मानसिक और शारीरिक क्षमता की भी जांच होती थी.
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