भारत की दो सबसे अहम खुफिया एजेंसियां हैं, रिसर्च एंड एनालिसेस विंग RAW और एंटेलिजेंस ब्यूरो IB. RAW जहां विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने का काम करती है, वहीं IB देश के अंदर आंतरिक सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों पर नजर रखती है. दोनों ही एजेंसियां देश की सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानी जाती है, और इनके चीफ को सरकार में बेहद संवेदनशील और जिम्मेदार पदों में गिना जाता है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों की सैलरी में एक ऐसा तकनीकी फर्क भी रहा है. 

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दोनों के चीफ को मिलती है बिल्कुल बराबर बेसिक सैलरी

अगर आप सोचते हैं कि किसी एक एजेंसी के चीफ को दूसरे से ज्यादा सैलरी मिलती है, तो आप गलत हैं. नियमों के मुताबिक, RAW चीफ और IB डायरेक्टर दोनों की बेसिक सैलरी बिल्कुल बराबर होती है. भारत सरकार ने 7th Pay Commission के तहत दोनों ही शीर्ष पदों को Apex Scale यानी पे लेवल 17/18 में रखा है. इस स्केल के तहत दोनों ही अधिकारियों को 2,25,000 प्रति महीना की फिक्स बेसिक सैलरी मिलती है. यह वेतनमान भारत के कैबिनेट सेक्रेटरी या भारत सरकार के सचिव रैंक के अधिकारियों के बराबर होता है.

भत्तों के मामले में कौन मारता है बाजी?

भले ही दोनों अधिकारियों की बेसिक सैलरी एक समान 2.25 लाख हो, लेकिन उनके हाथ में आने वाली कुल इन-हैंड सैलरी में थोड़ा अंतर आ जाता है. इसका कारण दोनों एजेंसियों के काम करने का तरीका और उन्हें मिलने वाले भत्ते हैं.RAW का मुख्य काम देश से बाहर विदेशों में खुफिया जानकारी जुटाना होता है. RAW के अधिकारियों और प्रमुख को एक विशेष फॉरेन सर्विंग अलाउंस और सीक्रेसी अलाउंस मिलता है. जब ये भत्ते, महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाएं जुड़ती हैं, तो RAE चीफ की कुल मासिक सैलरी 3.5 लाख से 4 लाख प्रति महीना तक पहुंच जाती है. 

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IB का मुख्य काम देश के अंदर रहकर आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों को संभालना है. IB के डायरेक्टर को बेसिक सैलरी के साथ 20% का स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस, महंगाई भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं मिलती हैं. चूंकि IB का काम मुख्य रूप से घरेलू होता है, इसलिए इसमें RAW की तरह विदेशी भत्ते शामिल नहीं होते.

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आजादी के पहले से चला आ रहा है यह पद

IB को दुनिया की सबसे पुरानी खुफिया एजेंसियों में गिना जाता है, और अंग्रेजों के जमाने में डायरेक्टर ऑफ इंटेलिजेंस ब्यूरो को 3,500 रुपये प्रति माह की सैलरी मिलती थी, जो आजादी के बाद घटकर 2,500 रुपये रह गई थी. इसके बावजूद यह देश का इकलौता पुलिस अधिकारी पद था, जिसे अपेक्स पे स्केल मिलता था, जब तक बाद में BSF और CRPF चीफ को भी यह दर्जा नहीं दिया गया. इस तरह देखा जाए तो सैलरी के मामले में RAW और IB चीफ लगभग बराबर हैं. 

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