उड़ने वाली कारों के बारे में हमने लंबे समय से फिल्मों और साइंस-फिक्शन की दुनिया में ही देखा है या सुना है, लेकिन उत्तराखंड के एक युवा इनोवेटर ने इस सपने को जमीन पर सच बनाने की कोशिश की है. अल्मोड़ा के रवि तमता ने करीब 13 साल तक लगातार सीखने, प्रयोग करने और अपनी तकनीक को बेहतर बनाने के बाद एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है. खास बात यह है कि इसके पीछे किसी बड़े ऑटोमोबाइल संस्थान या इंजीनियरिंग लैब की ताकत नहीं, बल्कि खुद से हासिल किया गया तकनीकी ज्ञान और लगातार प्रयोग हैं.

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रवि तमता के बनाए इस सिंगल-सीटर वाहन का नाम HAPIDA SKYNeX है. अगस्त 2026 में इस प्रोटोटाइप ने अल्मोड़ा में टेस्ट फ्लाइट पूरी की. वाहन ने आर्मी हेलिपैड से उड़ान भरी और करीब एक मिनट तक हवा में रहा. यह अभी शुरुआती प्रोटोटाइप है, इसलिए इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार वाहन नहीं माना जा सकता. आगे इसकी सुरक्षा, स्थिरता, बैटरी और उड़ान क्षमता को लेकर कई स्तरों पर परीक्षण होना जरूरी है.

पहाड़ों की मुश्किल ने दिया आइडिया

रवि के इस प्रोजेक्ट के पीछे सिर्फ तकनीक के प्रति जूनून नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों की एक वास्तविक समस्या भी है. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें घुमावदार हैं और कई जगहों तक पहुंचने में काफी समय लगता है. खासतौर पर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान दूरी और खराब कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती बनती है. इसी समस्या ने रवि को ऐसा वाहन बनाने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया, जो सड़क पर चलने के बजाय हवा के रास्ते कम समय में दूरी तय कर सके. उनका विचार ऐसा इलेक्ट्रिक वाहन तैयार करना था, जिसे रनवे की जरूरत न पड़े और जो सीधे ऊपर उठकर उड़ान भर सके.

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ड्रोन तकनीक से तैयार किया फ्लाइंग व्हीकल

HAPIDA SKYNeX की तकनीक का आधार मल्टीरोटर ड्रोन जैसा सिस्टम है. वाहन में कई इलेक्ट्रिक मोटर्स और प्रोपेलर्स लगाए गए हैं, जो मिलकर इसे ऊपर उठाने के लिए जरूरी लिफ्ट पैदा करते हैं. इसे VTOL यानी Vertical Take-Off and Landing कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है. इसका मतलब है कि वाहन को उड़ान भरने के लिए विमान की तरह लंबे रनवे की जरूरत नहीं होती. प्रोटोटाइप में एक व्यक्ति के बैठने के लिए कॉकपिट और हल्का फ्रेम दिया गया है. इसका इलेक्ट्रिक पावर सिस्टम बैटरी से चलता है और वाहन में सीधे पेट्रोल या डीजल इंजन का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

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40 किलोमीटर का सफर हो सकता है आसान

इस प्रोजेक्ट की सबसे दिलचस्प संभावनाओं में से एक पहाड़ी इलाकों में छोटी दूरी के सफर को तेज करना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 40 किलोमीटर की ऐसी सड़क यात्रा, जिसमें पहाड़ी रास्तों के कारण लगभग 90 मिनट लग सकते हैं, हवाई रास्ते से करीब 10-15 मिनट में पूरा किया जा सकता है. मौजूदा प्रोटोटाइप अभी विकास और परीक्षण के चरण में है.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बिना सीखी तकनीक

रवि तमता के पास इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं है. उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी, अपने प्रयोगों और लगातार परीक्षणों के जरिए इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी तकनीकी समझ विकसित की. करीब 13 वर्षों तक इसी प्रक्रिया में काम करते हुए उन्होंने अपने आइडिया को एक उड़ने वाले प्रोटोटाइप तक पहुंचाया. उनके पहले के प्रयोगों में मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्मार्ट स्टिक और आग बुझाने से जुड़े इनोवेशन भी शामिल रहे हैं.

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