नई दिल्ली: गरीबी और लाचारी ने जिस मासूम से उसका बचपन छीन लिया था आज वही अपने सपनों को पूरे करने के लिए देश के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय का हिस्सा बन चुका है. ये कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है. हम बात कर रहे हैं राजेश कुमार जाटव की जिसे गरीबी के कारण बंधुआ मजदूरी का दंश झेलना पड़ा. राजेश के पिता की आमदनी इतनी नहीं थी कि वह अपने पूरे परिवार का पेट पाल पाते इसलिए उन्होंने राजेश समेत परिवार के सभी सदस्यों को ईंट भट्टे पर काम में लगा दिया.
यहां ये लोग 18-18 घंटे काम करते और इन्हें शारीरिक तौर पर प्रताड़ित भी किया जाता. इसी दौरान साल 2007 में राजेश को नौ साल की उम्र में कैलाश सत्यार्थी के संगठन 'बचपन बचाओ आंदोलन' ने बंधुआ मजदूरी के जाल से मुक्ति किया. इसके बाद राजेस ने पढ़ाई शुरू की और आज वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी इलेक्ट्रोनिक्स का छात्र है.
बचपन से था पढ़ाई में तेज
एनजीओ ने राजेश को शुरुआती शिक्षा देने के बाद उसका दाखिला पांचवीं कक्षा में कराया. बचपन से पढ़ाई-लिखाई में तेज राजेश कक्षा आठवीं और नौवीं में लगातार दो साल राजस्थान सरकार की ओर से विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया गया. राजेश ने 10वीं कक्षा में 81 फीसदी और 12वीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. अच्छे नम्बर लाने के लिए राजस्थान सरकार ने राजेश को दो बार लैपटॉप दिया.
राजेश जाटव बाल मजबूरी और मानव तस्करी की वजह शिक्षा और आर्थिक तंगी को मानते हैं. वह कहते हैं, ‘‘मेरे हिसाब से शिक्षा की कमी की वजह से माता-पिता अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं. भले ही इसके पीछे मुख्य कारण आर्थिक तंगी हो, लेकिन अगर माता-पिता को शिक्षा की अहमियत पता होगी तो वे बच्चों को काम पर लगाने के बजाय पढ़ाएंगे.’’
यह भी पढें-
इमरान खान ने फिर दी परमाणु बम की धमकी, कहा- कश्मीर को लेकर आमने सामने हैं दो परमाणु ताकत वाले देश
राजनाथ सिंह बोले- पाकिस्तान ने आतंकवाद को नहीं रोका तो उसके टुकड़े होने से कोई नहीं रोक सकता
शरद पवार बोले- पाकिस्तान में मिला था बहुत प्यार, पड़ोसी देश को मुद्दा बनाकर पैदा किया जा रहा है डर
IND vs SA: धर्मशाला में भारत-द.अफ्रीका के बीच पहला टी-20 आज, हार्दिक की वापसी से मजबूत हुई टीम
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI