मानकों का उल्लंघन करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (मेडिकल कॉलेज) की मान्यता रद्द कर दी गई है. यह फैसला राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने लिया है, जिसके तहत इस कॉलेज में MBBS कोर्स चलाने की अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है. गौर करने वाली बात यह है कि इस कॉलेज में 2025-26 सत्र के लिए 50 MBBS सीटें मंजूर की गई थीं, लेकिन अब इन सीटों पर नया एडमिशन नहीं होगा. साथ ही, यह भी जानते हैं कि इस सेशन में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स का क्या होगा?
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि काकरयाल स्थित यह कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से जुड़ा हुआ है. सितंबर 2025 में NMC ने इसे 50 सीटों के साथ MBBS कोर्स शुरू करने की इजाजत दी थी. NMC के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 2 जनवरी 2026 को कॉलेज का अचानक निरीक्षण किया, जिसमें कई बड़ी कमियां मिलीं. इन्हीं कमियों को देखते हुए कॉलेज से अनुमति वापस ले ली गई.
निरीक्षण में क्या-क्या कमियां मिलीं?
बताया जा रहा है कि कॉलेज में सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों और डॉक्टरों की कमी थी. कॉलेज में जरूरत से 39 प्रतिशत कम शिक्षक थे. ट्यूटर, प्रदर्शक और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी तो 65 प्रतिशत तक थी. एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में भरपूर स्टाफ होना चाहिए, ताकि छात्रों को सही ट्रेनिंग मिले, लेकिन यहां बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं हो रही थी.
मरीजों की संख्या भी बेहद कम
नियमों के मुताबिक, इस कॉलेज की ओपीडी में रोजाना कम से कम 400 मरीज आने चाहिए थे, जिनकी संख्या सिर्फ 182 ही थी. इसके अलावा अस्पताल के बेड 80 प्रतिशत भरे होने चाहिए थे, लेकिन केवल 45 प्रतिशत ही भरे थे. ICU में भी आधे ही बेड इस्तेमाल हो रहे थे. वहीं, डिलीवरी के मामले तो सिर्फ 25 ही मिले, जो बेहद कम हैं. एक ट्रेनिंग कॉलेज में मरीजों का लोड जरूरी होता है, ताकि छात्र प्रैक्टिकल अनुभव ले सकें.
लाइब्रेरी की हालत भी खराब
बताया जा रहा है कि कॉलेज की लाइब्रेरी में जरूरत के मुकाबले आधी किताबें ही थीं. यहां 1500 किताबें होनी चाहिए, जिनकी जगह सिर्फ 744 किताबें मिलीं. मेडिकल जर्नल्स तो सिर्फ 2 थे, जबकि 15 होने चाहिए थे. कई विभागों में लैब, रिसर्च रूम, व्याख्यान कक्ष जैसी बेसिक सुविधाएं तक नहीं थीं. कुछ जगहों पर पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग वार्ड नहीं थे. छोटे ऑपरेशन के लिए जगह नहीं थी. कुल मिलाकर सिर्फ 2 ऑपरेशन थिएटर ही काम कर रहे थे. ये सभी कमियां NMC के न्यूनतम मानकों के खिलाफ थीं.
अब छात्रों का क्या होगा?
सबसे अहम सवाल यह है कि इस सेशन में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स का अब क्या होगा? NMC ने साफ कहा है कि किसी भी छात्र की सीट नहीं जाएगी. 2025-26 सत्र में जितने स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया है, उन्हें अतिरिक्त सीटों के रूप में जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में भेजा जाएगा. यह जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर है. वे जल्दी ही छात्रों को नए कॉलेजों में एडजस्ट करेंगे. इससे छात्रों की पढ़ाई बिना रुके जारी रहेगी.
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