बिहार के नवादा जिले के छोटे से कस्बे वारिसलीगंज में जश्न का माहौल है. वजह है यहां के एक होनहार छात्र की शानदार कामयाबी. दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने गुरुवार (16 जुलाई) को नीट-यूजी के नतीजे घोषित किए. इसमें वारिसलीगंज के रहने वाले छात्र आयुष भलोटिया ने पूरे भारत में चौथा स्थान हासिल किया. 

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वारिसलीगंज में जश्न का माहौल

जैसे ही यह खुशखबरी आयुष के गांव और आस-पड़ोस के लोगों तक पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों और शुभचिंतकों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा करवा रहे हैं, मिठाइयां बांट रहे हैं और जमकर पटाखे फोड़ रहे हैं. हर किसी का यही कहना है कि एक छोटे से शहर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में चौथा स्थान हासिल करना कोई मामूली बात नहीं है.

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AIIMS दिल्ली में पढ़ने का सपना साकार

मेडिकल की पढ़ाई करने वाले हर छात्र का सबसे बड़ा सपना होता है कि उसे दिल्ली के एम्स में दाखिला मिले. एम्स दिल्ली को देश का सबसे बेहतरीन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल माना जाता है. आयुष ने अपनी मेहनत से इस सपने को हकीकत में बदल दिया. 

अपनी शानदार रैंक की वजह से अब आयुष का दिल्ली के एम्स में पढ़ना पूरी तरह तय हो चुका है. उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा से मरीजों की सेवा करने और अच्छा डॉक्टर बनने का सपना देखा था, जो अब पूरा होने जा रहा है.

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आयुष की सफलता से जुड़ी खास बातें

  • रैंक: पूरे भारत में चौथा स्थान
  • लक्ष्य: एम्स नई दिल्ली में पढ़ाई
  • प्रेरणा: सीमित संसाधनों के बाद भी हार न मानना
  • मूल मंत्र: कड़ी मेहनत, अनुशासन और माता-पिता का आशीर्वाद

सीमित संसाधनों में पाई असीमित सफलता

आयुष की यह कामयाबी उन सभी छात्रों के लिए सबक है, जिन्हें लगता है कि अच्छी पढ़ाई सिर्फ बड़े शहरों में ही हो सकती है. वारिसलीगंज जैसे इलाके में महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं और बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर आसानी से नहीं मिलते. इसके बावजूद आयुष ने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का दृढ़ संकल्प हो तो इंसान किसी भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच सकता है.

आयुष रोजाना पूरे अनुशासन के साथ कई घंटे पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी किताबों पर लगाया. इस सफलता के लिए उन्होंने कई चीजों का त्याग किया और अपनी मंजिल से ध्यान नहीं भटकने दिया. 

माता-पिता और शिक्षकों को दिया श्रेय

आयुष ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. जब भी वह पढ़ाई करते-करते थक जाते या निराश महसूस करते तो उनके परिवार ने उन्हें हिम्मत दी. वहीं, टीचर्स ने उन्हें हमेशा सही रास्ता दिखाया और उन्हें परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार किया.

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