एनसीईआरटी की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. इस किताब में पुराने भारत के समाज में महिलाओं की भूमिका और सामाजिक व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई है. साथ ही, इसमें मनुस्मृति का भी एक संदर्भ जोड़ा गया है. किताब में यह भी बताया गया है कि समय के साथ महिलाओं की स्थिति और समाज, दोनों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं.

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कक्षा 9 की इस किताब में बताया गया है कि वैदिक समय में महिलाओं को सम्मानित दर्जा दिया जाता था. महिलाएं पढ़ाई करती थीं, धार्मिक कामों में हिस्सा लेती थीं और कई जगहों पर अपनी बात भी रखती थीं. किताब में कुछ ऐसी महिलाओं का भी जिक्र किया गया है, जिनका नाम पुराने ग्रंथों में मिलता है.

इस किताब में मनुस्मृति की एक पंक्ति, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता', यानी जहां महिलाओं का आदर-सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं, श्लोक को शामिल किया गया है. इसमें महिलाओं के सम्मान की बात कही गई है. इसमें यह भी साफ लिखा गया है कि हर समय महिलाओं की स्थिति एक जैसी नहीं रही है. समय के साथ बदलाव हुए. समय बदलने के साथ महिलाओं की भूमिका में आए बदलावों के बारे में भी अध्याय में बताया गया है. बताया गया है कि जैसे-जैसे समाज और राजनीति में बदलाव हुए, वैसे-वैसे महिलाओं की स्थिति में भी बदलाव आए. कुछ समय के लिए उनकी भागीदारी कम हुई, लेकिन उन्होंने घर, खेती, कामकाज और समाज में अपना योगदान देना जारी रखा. यह भी पढ़ें - हिमाचल में TET को लेकर बड़ी अपडेट, हजारों शिक्षकों को मिला 2028 तक का समय

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'भारत और विश्व' के नाम का चैप्टर भी जोड़ा गया

कक्षा 9 की इस किताब में 'भारत और विश्व' नाम का एक अध्याय है, जिसमें वैदिक काल के बारे में जानकारी दी गई है. इस पाठ में उस दौर में महिलाओं की मजबूत स्थिति के बारे में बताया गया है कि उस समय महिलाओं को शिक्षा का पूरा अधिकार था. समाज के हर जरूरी काम में महिलाएं भागीदार होती थीं और अपनी मर्जी से अपना वर चुन सकती थीं. साथ ही बताया गया है कि समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए गए थे. इससे पहले भी यह किताब काफी चर्चा में रही, जब SIR और चुनाव की तारीफों के पुल बांधे गए थे.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी हुआ था विवाद

यह चैप्टर तब लाया गया है, जब हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के लॉ फैकल्टी में मनुस्मृति को पढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर काफी विवाद हुआ था. इस फैसले का काफी विरोध हुआ और फिर डीयू के वाइस चांसलर ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. आखिरकार, मनुस्मृति को कोर्स में शामिल नहीं किया गया. अब NCERT की स्कूल की किताब में इसका जिक्र होने से विवाद बढ़ सकता है. यह भी पढ़ें - यूपी के छात्रों की होगी बल्ले-बल्ले! स्कॉलरशिप से लेकर फ्री टैबलेट तक, जानें 8 बड़ी योजनाएं


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