देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की भूमिका बेहद जरूरी मानी जाती है. आज CBSE समेत देश के लाखों छात्र NCERT की किताबों से पढ़ाई करते हैं, जबकि UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी ये पुस्तकें आधार मानी जाती हैं.

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NCERT की स्थापना 1 सितंबर 1961 को शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में स्कूली शिक्षा के लिए एक समान और हाई क्वालिटी वाले मानक विकसित करना था. इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा संबंधी नीतिगत सलाह देना और विद्यार्थियों के लिए मॉडल पाठ्यपुस्तकों का निर्माण भी इसकी जिम्मेदारी बनाई गई.

NCERT का गठन सात प्रमुख सरकारी संस्थानों को मिलाकर किया गया था. इनमें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ टेक्स्टबुक रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक एजुकेशन जैसे संस्थान शामिल थे. इन संस्थाओं के एकीकरण का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकास को एक मंच पर लाना था.

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कोठारी आयोग की अहम भूमिका

NCERT के विकास में 1964 में गठित कोठारी आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोग ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की सिफारिश की थी और राष्ट्रीय स्तर पर एक समान पाठ्यक्रम तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का रोडमैप दिया था. इसके बाद NCERT ने देश की बदलती जरूरतों के अनुसार शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया.

वर्ष 1974 में NCERT को साहित्यिक, वैज्ञानिक और परोपकारी संस्था के रूप में आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया गया. इसके बाद संस्था ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework-NCF) तैयार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए.

1975 में बड़ा बदलाव

1975 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर "टेन-ईयर स्कूल करिकुलम" पेश किया गया. इसका उद्देश्य शिक्षा को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं से जोड़ना था. इसके बाद 1988 में नई शिक्षा नीति 1986 के अनुरूप पाठ्यचर्या में बदलाव किए गए और बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करने के साथ छात्र-केंद्रित शिक्षा पर जोर दिया गया.

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साल 2000 में पाठ्यक्रम में बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण, पर्यावरण शिक्षा और विषयों के बीच बेहतर समन्वय को शामिल किया गया. वहीं 2005 की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को NCERT के इतिहास में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जाता है. इस दौरान रटकर पढ़ाई करने की बजाय समझ आधारित और समग्र शिक्षा पर जोर दिया गया. इसके तहत पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण पद्धति में बड़े बदलाव किए गए.

लगातार हो रहे बदलाव

हाल के वर्षों में भी NCERT लगातार पाठ्यक्रम में संशोधन कर रहा है. नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप वर्ष 2023 में एक नई समिति का गठन किया गया, जिसमें लेखिका सुधा मूर्ति और प्रसिद्ध संगीतकार शंकर महादेवन जैसी हस्तियों को शामिल किया गया. यह समिति कक्षा 3 से 12 तक के लिए नए पाठ्यक्रम और पुस्तकों को अंतिम रूप देने का काम कर रही है.

NCERT की किताबें आज CBSE स्कूलों के लिए मुख्य अध्ययन सामग्री हैं. इसके अलावा कई राज्य शिक्षा बोर्ड भी इन्हीं पुस्तकों को आधार बनाकर अपना पाठ्यक्रम तैयार करते हैं. UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी NCERT की किताबें बुनियादी अध्ययन सामग्री मानी जाती हैं. यह भी पढ़ें - UGC क्या है? कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर कैसे रखता है नजर


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