प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में हर साल हजारों कहानियां बनती हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपनी मेहनत से अलग पहचान बना लेते हैं. जेईई मेन सेशन-1 के नतीजों में एक ऐसा ही नाम सामने आया है. इस बार कबीर छिल्लर ने 300 में 300 अंक और सीधे ऑल इंडिया रैंक-1. यह सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, साफ सोच और सही तरीके से पढ़ाई करने का नतीजा है.

Continues below advertisement

30 जुलाई 2008 को जन्मे कबीर, मूल रूप से गुरुग्राम से हैं. परिवार में पढ़ाई का माहौल हमेशा से रहा. पिता मोहित छिल्लर आईआईटी से पढ़े हैं और एक निजी कंपनी में काम करते हैं. मां प्रियंका छिल्लर एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं. घर में पढ़ाई को लेकर अनुशासन और समझ, दोनों मिले. यही माहौल कबीर के लिए मजबूत आधार बना.

कबीर ने इससे पहले 10वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. तभी साफ हो गया था कि वह पढ़ाई को सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रखते, बल्कि विषय को समझने में भरोसा रखते हैं. जेईई मेन की तैयारी के दौरान भी उन्होंने यही तरीका अपनाया.

Continues below advertisement

पढ़ाई का अलग तरीका बना ताकत

कबीर मानते हैं कि पढ़ाई का समय लंबा होना जरूरी नहीं, बल्कि ध्यान और गुणवत्ता ज्यादा जरूरी है. वे सेल्फ स्टडी के दौरान यह देखते थे कि जो पढ़ रहे हैं, वह पूरी तरह समझ में आए. हर टेस्ट के बाद वे खुद बैठकर अपना विश्लेषण करते थे कहां गलती हुई, क्यों हुई, और उसे कैसे सुधारना है.

यह भी पढ़ें -  UP Board Result 2026: कभी भी जारी हो सकता है 10वीं-12वीं रिजल्ट पर बड़ा अपडेट

वे नियमित मॉक टेस्ट देते थे. लेकिन सिर्फ टेस्ट देना ही नहीं, बल्कि हर पेपर का गहराई से विश्लेषण करना उनकी आदत थी. इससे उनकी एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट दोनों बेहतर होते गए. कबीर कहते हैं कि रटने से ज्यादा जरूरी है कॉन्सेप्ट साफ होना. हर टॉपिक को समझना और उसे सवालों में लागू करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही.

छोटे लक्ष्य, नियमित रिवीजन

कबीर ने अपनी पढ़ाई को छोटे-छोटे टारगेट में बाँटा. शॉर्ट नोट्स बनाए, ताकि जल्दी रिवीजन हो सके. नियमित दोहराव उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. वे कहते हैं कि गलतियों को दोहराने से बचना ही असली तैयारी है. इसलिए हर टेस्ट के बाद वे अपनी कमजोरियों पर ज्यादा ध्यान देते थे. पढ़ाई के साथ वे दोस्तों के साथ समय बिताना भी जरूरी मानते हैं. उनका मानना है कि मानसिक रूप से ताजा रहना भी सफलता का एक अहम हिस्सा है. कबीर ने जेईई मेन का सेशन-2 नहीं दिया. सेशन-1 में ही परफेक्ट स्कोर के साथ टॉप करने के बाद उन्होंने आगे की तैयारी पर ध्यान दिया.

परिवार का साथ, लक्ष्य साफ

कबीर की इस सफलता में परिवार का बड़ा योगदान है. पिता का तकनीकी बैकग्राउंड और मां का शिक्षण अनुभव, दोनों ने उन्हें सही दिशा दी. घर में पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं, बल्कि समझ और सहयोग का माहौल रहा. भविष्य को लेकर भी कबीर का लक्ष्य साफ है. वे आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहते हैं. इसके बाद वे दुनिया के प्रसिद्ध संस्थान एमआईटी से आगे की पढ़ाई का सपना देखते हैं. रिपोर्ट - दीनेश कश्यप

यह भी पढ़ें -  J&K 10th Result 2026: जम्मू बोर्ड ने जारी किए 10वीं के नतीजे, जानिए कितने छात्र छात्राओं ने मारी बाजी


Education Loan Information:

Calculate Education Loan EMI