देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाने वाली JEE Advanced 2026 का परिणाम सामने आते ही हजारों छात्रों के घरों में खुशी का माहौल है. महीनों की मेहनत, कोचिंग, मॉक टेस्ट और लगातार पढ़ाई के बाद 56,880 छात्रों ने JEE Advanced की बाधा पार कर ली है. लेकिन परीक्षा पास करने के बाद अब शुरू होती है असली लड़ाई, जहां हर सीट के लिए कई छात्र मुकाबले में हैं.

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इस साल JEE Main में 17 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. इनमें से केवल करीब 2.5 लाख छात्रों को JEE Advanced में बैठने का मौका मिला. इसके बाद लगभग 1.80 लाख छात्रों ने JEE Advanced की परीक्षा दी.

इन लाखों उम्मीदवारों में से सिर्फ 56,880 छात्र ही परीक्षा पास कर सके. जेईई एडवांस्ड का रिजल्ट आने के बाद सभी सफल उम्मीदवारों की नजर अब JoSAA काउंसलिंग पर है. यहीं तय होगा कि किस छात्र को कौन सा IIT और कौन सी ब्रांच मिलेगी.

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कितनी हैं सीटें?

देश के 23 IIT में कुल मिलाकर करीब 18 हजार सीटें उपलब्ध हैं. इनमें बीटेक, ड्यूल डिग्री और अन्य इंजीनियरिंग कोर्स शामिल हैं. दूसरी तरफ JEE Advanced पास करने वाले छात्रों की संख्या लगभग 57 हजार है. अगर आंकड़ों को देखें तो एक सीट के लिए औसतन तीन से ज्यादा उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं. यही वजह है कि क्वालिफाई करने के बाद भी हर छात्र को IIT में सीट मिल जाए, ऐसा संभव नहीं है.

टॉप IIT में मुकाबला और ज्यादा कठिन

IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT मद्रास, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर जैसे संस्थानों में प्रवेश पाने की चाह लगभग हर छात्र की होती है. वहीं कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसी ब्रांचों की मांग सबसे ज्यादा रहती है.

किन IIT में सबसे ज्यादा सीटें?

सीटों की संख्या के मामले में IIT खड़गपुर सबसे आगे माना जाता है. इसके बाद IIT (BHU) वाराणसी, IIT बॉम्बे और IIT रुड़की का नाम आता है. इन संस्थानों में सीटें अधिक हैं, लेकिन यहां भी मांग काफी ज्यादा रहती है.

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लड़कियों ने भी दिखाई दमदार मौजूदगी

इस साल JEE Advanced में सफल उम्मीदवारों में 10 हजार से ज्यादा छात्राएं शामिल हैं. पिछले कुछ वर्षों में IIT में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष सीटों की व्यवस्था की गई है, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है.

काउंसलिंग में एक गलती पड़ सकती है भारी

रिजल्ट के बाद अब सबसे अहम चरण काउंसलिंग का है. कई बार अच्छी रैंक वाले छात्र भी गलत चॉइस फिलिंग या जल्दबाजी के कारण बेहतर विकल्प खो देते हैं.

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