देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली JEE (Advanced) परीक्षा को अब और बेहतर, निष्पक्ष और कम तनावपूर्ण बनाने की दिशा में IIT काउंसिल ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इस बार IIT काउंसिल ने एडेप्टिव टेस्टिंग सिस्टम लागू करने की संभावना पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की सिफारिश की है. इस नए सिस्टम में छात्रों के स्तर के अनुसार सवाल रियल-टाइम में बदलेंगे, जिससे परीक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम होगा.

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एडेप्टिव टेस्टिंग में सवाल शुरुआत में आसान होते हैं और जैसे-जैसे छात्र सही जवाब देते हैं, सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है. इसका फायदा यह होता है कि परीक्षा आयोजित करने वाले यह जान सकते हैं कि छात्र किस स्तर तक समझ और सोच सकते हैं. इससे छात्र की रीजनिंग और सोचने की क्षमता का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकता है.

IIT काउंसिल ने सुझाव दिया है कि JEE (Advanced) 2026 से पहले एक ऑप्शनल पायलट एडेप्टिव टेस्ट कराया जाए. इसका उद्देश्य छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े इकट्ठा करना है. इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में एडेप्टिव टेस्टिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है.

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कोचिंग पर निर्भरता घटाने की कोशिश

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने बैठक में मौजूदा JEE (Advanced) सिस्टम पर चिंता जताई. उनका कहना है कि परीक्षा के कारण एक बड़ा कोचिंग उद्योग खड़ा हो गया है, जिससे छात्रों और परिवारों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है.

उन्होंने सुझाव दिया कि एडेप्टिव और एप्टीट्यूड आधारित सवालों से कोचिंग पर निर्भरता कम हो सकती है. उनका मानना है कि कोचिंग किसी छात्र की जन्मजात बुद्धिमत्ता नहीं बदल सकती, बल्कि उसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना सिखाती है.

फ्री मॉक टेस्ट

IIT काउंसिल ने यह भी सिफारिश की है कि JEE (Advanced) से लगभग दो महीने पहले फ्री मॉक टेस्ट कराया जाए. इसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा पैटर्न से परिचित कराना और तैयारी के दौरान तनाव को कम करना है. बता दें कि JEE (Advanced) आमतौर पर मई महीने में आयोजित होती है.

इन बातों पर फोकस

बैठक में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर चर्चा हुई. हाल के वर्षों में IIT कैंपस में आत्महत्या के मामलों को देखते हुए काउंसिल ने सभी IIT में मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की सिफारिश की है. इसमें काउंसलर, साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिस्ट शामिल हैं. ये नियुक्तियां नियमित या कॉन्ट्रैक्ट आधार पर की जा सकती हैं.

IIT गांधीनगर को इन पदों के स्ट्रक्चर, प्रमोशन और गुणवत्ता जांच का मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. IIT गांधीनगर के निदेशक प्रो. रजत मूना ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा कि फिलहाल IITs में अलग-अलग व्यवस्था है कहीं 500 छात्रों पर एक काउंसलर है, तो कहीं संख्या अलग है. अब IIT मिलकर एक समान और प्रभावी सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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