Air Force में कैसे बनते हैं एयर मार्शल, कितने प्रमोशन के बाद मिलता है यह पद?
भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल बनना बड़े सम्मान और जिम्मेदारी का पद है, जानिए फ्लाइंग ऑफिसर से तीन सितारा रैंक तक पहुंचने की प्रमोशन सीढ़ी.

भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल तीन सितारा रैंक वाला बेहद वरिष्ठ अधिकारी होता है. इस पद तक पहुंचने के लिए अधिकारी को कई रैंकों से गुजरना पड़ता है. हालांकि एयर मार्शल बनने के लिए प्रमोशन की कोई एक तय संख्या नहीं होती. सेवा रिकॉर्ड, अनुभव, प्रदर्शन, वरिष्ठता और चयन प्रक्रिया के आधार पर अधिकारी को आगे की जिम्मेदारी दी जाती है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का करियर इस सफर को समझने का अच्छा उदाहरण है. वायुसेना में करीब चार दशक सेवा देने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पद संभाले और अब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
फ्लाइंग ऑफिसर से एयर मार्शल तक कैसे पहुंचते हैं?
भारतीय वायुसेना में अधिकारी के करियर की शुरुआत फ्लाइंग ऑफिसर की रैंक से होती है. इसके बाद फ्लाइट लेफ्टिनेंट, स्क्वाड्रन लीडर, विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन, एयर कमोडोर, एयर वाइस मार्शल और फिर एयर मार्शल की रैंक आती है. यानी एयर मार्शल बनने से पहले अधिकारी को कई वरिष्ठ रैंकों तक पहुंचना पड़ता है.हालांकि इसे केवल प्रमोशन की गिनती से नहीं समझना चाहिए. शुरुआती रैंकों पर पदोन्नति के लिए सेवा अवधि और तय मानदंड अहम होते हैं, जबकि वरिष्ठ रैंकों पर चयन और उपलब्ध पद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अधिकारी का प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड भी देखा जाता है.
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जितेंद्र मिश्रा ने कितने प्रमोशन के बाद हासिल किया एयर मार्शल पद?
जितेंद्र मिश्रा का वायुसेना करियर 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में कमीशन होने के साथ शुरू हुआ. उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के मुताबिक 1987 में वह फ्लाइंग ऑफिसर, 1991 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट, 1997 में स्क्वाड्रन लीडर, 2003 में विंग कमांडर और 2009 में ग्रुप कैप्टन बने. इसके बाद 2013 में उन्हें एयर कमोडोर, 2019 में एयर वाइस मार्शल और 1 जनवरी 2023 को एयर मार्शल की रैंक मिली. यानी शुरुआती फ्लाइंग ऑफिसर रैंक से एयर मार्शल तक पहुंचने के दौरान उनके करियर में कई पदोन्नतियां हुईं. उनका सफर बताता है कि वायुसेना में इतनी ऊंची रैंक तक पहुंचने के लिए लंबा अनुभव और लगातार बेहतर सेवा रिकॉर्ड जरूरी होता है.
एयर मार्शल से राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ तक
एयर मार्शल बनने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. 1 जनवरी 2025 को उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला. मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वह वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व कर रहे थे. उनके लंबे सैन्य अनुभव में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव भी शामिल रहा.
अप्रैल 2026 में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उनके करियर ने एक नया मोड़ लिया. सितंबर 2026 में उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया गया. अब वायुसेना में लंबे समय तक नेतृत्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. इस तरह उनका सफर एयर फोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर रैंक से एयर मार्शल और फिर राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ तक पहुंचने की कहानी बन गया है.
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