टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) ने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट 2026 जारी कर दी है, यह रैंकिंग दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज को अलग-अलग विषयों में उनके प्रदर्शन के आधार पर आंकती है. इस बार भी अमेरिका और ब्रिटेन का दबदबा बरकरार रहा, जबकि एशिया से चीन, सिंगापुर और जापान जैसी यूनिवर्सिटीज ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. भारत के लिए यह रैंकिंग एक बार फिर आत्ममंथन का मौका लेकर आई है, क्योंकि टॉप 100 में उसकी मौजूदगी बेहद सीमित नजर आई.

Continues below advertisement

भारत का प्रदर्शन: सीमित मौजूदगी पर बड़े सवालTHE की 2026 सब्जेक्ट रैंकिंग में भारत की ओर से केवल भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ही टॉप 100 में जगह बना पाया है. खास बात यह है कि IISc को यह स्थान कंप्यूटर साइंस जैसे अहम और तेजी से बढ़ते विषय में मिला है. इसके अलावा कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय किसी भी विषय में टॉप 100 में शामिल नहीं हो सका.यह रैंकिंग साफ इशारा करती है कि भारत में प्रतिभा और संस्थानों की कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर टॉप रैंक हासिल करने के लिए रिसर्च की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और इंडस्ट्री से जुड़ाव को और मजबूत करना होगा.जब इन क्षेत्रों में निरंतर और ठोस सुधार होगा, तभी भारतीय यूनिवर्सिटीज दुनिया की टॉप लिस्ट में स्थायी जगह बना पाएंगी.

कंप्यूटर साइंस में ही आगे देखें तो IISc के बाद एमिटी यूनिवर्सिटी को 251–300 रैंक के बीच और जामिया मिलिया इस्लामिया को 301–400 रैंक के दायरे में स्थान मिला है.

Continues below advertisement

रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में क्यों पिछड़ रहा भारत?रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय यूनिवर्सिटीज रिसर्च क्वालिटी, हाई-इम्पैक्ट पब्लिकेशन और इंटरनेशनल साइटेशन जैसे अहम पैमानों पर चीन, सिंगापुर, हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया से पीछे हैं.हालांकि भारत ने हाल के वर्षों में रिसर्च आउटपुट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में सुधार जरूर किया है, लेकिन यह प्रगति अभी इतनी मजबूत नहीं है कि लगातार टॉप 50 या टॉप 20 में जगह बना सके.विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित फंडिंग, इंडस्ट्री-एकेडेमिया सहयोग की कमी और ग्लोबल रिसर्च नेटवर्क में कम भागीदारी भारत की रैंकिंग पर असर डालती है.

अमेरिका और ब्रिटेन की बादशाहत कायमTHE रैंकिंग 2026 में अमेरिका और ब्रिटेन का दबदबा साफ दिखाई देता है. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) को दुनिया का सबसे प्रभावशाली संस्थान माना गया है. MIT ने आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज, बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स और सोशल साइंसेज तीनों विषयों में पहला स्थान हासिल किया है.कुल 11 में से 8 विषयों में अमेरिका की यूनिवर्सिटीज शीर्ष पर रहीं, जबकि ब्रिटेन ने साइकोलॉजी समेत 3 विषयों में पहला स्थान दर्ज किया. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने 2022 के बाद पहली बार साइकोलॉजी में नंबर वन पोजिशन हासिल की है.

चीन का उभार, एशिया की बदलती तस्वीरइस साल की रैंकिंग में चीन का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है. चीन ने सभी विषयों में टॉप 10 के भीतर कुल 7 स्थान हासिल किए हैं, जो पिछले साल की तुलना में बड़ा उछाल है. पेकिंग यूनिवर्सिटी ने पहली बार कंप्यूटर साइंस में टॉप 10 में जगह बनाई, जबकि त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी ने फिजिक्स में टॉप 10 में एंट्री की है. यह संकेत है कि एशिया में रिसर्च और इनोवेशन का केंद्र तेजी से बदल रहा है.

रैंकिंग कैसे तय होती है?THE रैंकिंग 11 विषयों में 18 मानकों के आधार पर तैयार की जाती है. इनमें शिक्षण की गुणवत्ता, रिसर्च, रिसर्च साइटेशन, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और इंडस्ट्री से होने वाली आय जैसे पैमाने शामिल होते हैं, जिनके कुल स्कोर से अंतिम रैंकिंग तय होती है.

  2026 की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज

  1. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (यूके)
  2. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी – MIT (अमेरिका)
  3. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
  4. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके)
  5. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
  6. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
  7. कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी – Caltech (अमेरिका)
  8. इम्पीरियल कॉलेज लंदन (यूके)
  9. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (अमेरिका)
  10. येल यूनिवर्सिटी (अमेरिका) यह भी पढ़ें - कितनी पढ़ी-लिखी हैं ओवैसी की पार्टी AIMIM पार्षद Sahar Shaikh, जिनके भड़काऊ भाषण हो रहे वायरल?

Education Loan Information:

Calculate Education Loan EMI