जून 2026 के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया है. विदेशी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाले भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स परीक्षा में कम प्रतिशत, पेपर के कठिन स्तर और वीडियो आधारित सवालों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. अब कुछ उम्मीदवार अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. जून 2026 की FMGE   परीक्षा में कुल 37,448 उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 12.38 फीसदी ही परीक्षा पास कर सके. रिजल्ट 10 जुलाई को जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थियों का विरोध शुरू हो गया था. उम्मीदवारों का आरोप है कि इस बार परीक्षा का पेपर सामान्य से ज्यादा कठिन था और वीडियो आधारित सवालों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना शामिल किया गया. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी लेकर शिकायत सामने आई. 

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3 अगस्त को जंतर मंतर पर हुआ था प्रदर्शन 

कम पास प्रतिशत के बाद जुलाई में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया. यह मामला 3 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर तक पहुंचा था, जहां ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन-फॉरेन मेडिकल स्टूडेंट विंग और ऑल FMGE  संगठन के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. प्रदर्शन के बाद अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज के अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए बुलाया गया. इसके बाद NBEMS ने जून FMGE से जुड़ी शिकायतों के लिए तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति का गठन किया. समिति को परीक्षा के आयोजन और उसके नतीजे की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई. बातचीत शुरू होने के बाद उम्मीदवारों ने कुछ समय के लिए अपना आंदोलन रोक दिया. उम्मीदवारों के अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शिकायतों का समाधान बातचीत के जरिए निकलेगा. उनका कहना है कि परीक्षा की आंसर की, पेपर की कठिनाई, वीडियो आधारित सवाल, परीक्षा फीस और दूसरे समस्याओं पर चर्चा हुई, लेकिन जून परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों को राहत देने की मांग आगे नहीं बढ़ सकी. 

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जून FMGE  के उम्मीदवारों के लिए मुआवजे की मांग

प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों की सबसे बड़ी मांग जून 2026 की एफएमजी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को मुआवजा या किसी तरह की राहत देने की है. उनका कहना है कि अगर परीक्षा को लेकर भविष्य के लिए बदलाव जरूरी माने गए, तो इस साल जून में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को भी राहत मिलनी चाहिए. उम्मीदवारों को कहना है कि वह बिना किसी प्रक्रिया के पास किए जाने की मांग नहीं कर रहे हैं, उनकी मांग एक बार की रियायत या मुआवजा को लेकर है. प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों का कहना है कि जिन समस्याओं का वे आरोप लगा रहे हैं, उनका असर जून बैच के प्रदर्शन पर पड़ा है ‌

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NBEMS और NMC का क्या कहना?

वीडियो आधारित सवालों को लेकर NBEMS और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का पक्ष अलग-अलग है. एनएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ऐसे सवालों के जरिए क्लीनिकल संकेत और मेडिकल स्थितियों को बेहतर तरीके से रखा जा सकता है, जिन्हें स्थिर तस्वीरों के जरिए हमेशा सही तरीके से नहीं जांचा जा सकता. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो आधारित सवाल मेडिकल ट्रेनिंग के अनुरूप है. एफएमजीई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट न्यूनतम जरूरी दक्षता के मानकों को पूरा करते हो. 

NExT को लेकर भी उम्मीदवारों का सुझाव 

कम पास प्रतिशत को लेकर उम्मीदवार विदेशी मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी दलीलों से भी सहमत नहीं है. उनका कहना है कि अगर भारतीय और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए समान दक्षता मानक तय करना है, तो दोनों के लिए एक ही बड़ी परीक्षा होनी चाहिए. प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों ने नेशनल एग्जिट टेस्ट को इसके लिए एक ऑप्शन के तौर पर सुझाया हैं. उनका मानना है कि भविष्य में नेक्स्ट के जरिए घरेलू और विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के लिए समान परीक्षा व्यवस्था बनाई जा सकती है.

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