प्राइवेट कॉलेज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्राइवेट कॉलेज में इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स में पढ़ाई कर रहे छात्रों की फीस अब कोर्स के बीच में नहीं बढ़ेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेज को कोर्स की फीस एडमिशन से पहले ही तय कर देनी चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कोर्स शुरू होने के बाद कुछ खास परिस्थितियों में ही फीस में बदलाव किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एडमिशन के बाद भी फीस स्ट्रक्चर में बदलाव को लेकर यह आदेश दिया है. 

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वहीं सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश के उन छात्रों के लिए अहम माना जा रहा है, जो किसी कोर्स के बीच में फीस बढ़ाने से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा कर रहे हैं. इस मामले को लेकर जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि फीस तय करने वाली समितियां को कोर्स के दौरान होने वाले संभावित खर्चों का आकलन करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई छात्र 4 से 5 साल के प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन लेता है, तो उसे फीस की जानकारी कोर्स के पहले ही दी जानी चाहिए. 

कब कर सकते हैं कोर्स के बीच में फीस बदलाव?

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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई ऐसी असाधारण परिस्थितियों आ जाती है, जिसमें अप्रत्यक्षित खर्च सामने आते हैं, तो फीस में बदलाव किया जा सकता है. हालांकि कोर्ट ने भी यह भी कहा है कि ऐसे बदलाव अपवाद स्वरूप ही होने चाहिए. 

 पश्चिम बंगाल मामले में आया स्पष्टीकरण 

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला डॉक्टर बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज और दूसरे प्राइवेट कॉलेज की उन अपील की सुनवाई के बाद सामने आया, जो कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ थी. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से 2023-27 बैच के लिए बीटेक के कोर्स में की गई 37 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी को भी रद्द कर दिया है. इसके अलावा इस कॉलेज ने छात्रों पर एक नई डेवलपमेंट फीस भी लगा दी थी, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फीस बढ़ोतरी को चुनौती देने वाले छात्रों के पक्ष में आदेश जारी किया.

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एडमिशन से पहले ही पूरे कोर्स की फीस बताना जरूरी 

शिक्षा के क्षेत्र में स्व-वित्तपोषित संस्थानों के योगदान की सराहना करते हुए जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि फीस के संबंध में निश्चितता होनी चाहिए और छात्रों को एडमिशन के समय निर्धारित फीस से ज्यादा का पेमेंट करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर परिवारों के लिए प्रोफेशनल कोर्स की फीस परिवार की आय और बचत का एक बड़ा हिस्सा होती है. यह कोई मामूली खर्च नहीं है. माता-पिता फीस का इंतजाम इस उम्मीद से करते हैं कि उनके बच्चे बेहतर योग्यताएं हासिल करें और अच्छी नौकरी के अवसर प्राप्त करें. वहीं कई छात्र और परिवार प्रोफेशनल कोर्स के लिए लोन पर भी निर्भर रहते हैं, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने यह बताया कि प्रोफेशनल कोर्स में ली जाने वाली फीस नॉर्मल प्रोग्राम की तुलना में 711 प्रतिशत ज्यादा होती है, इसलिए अदालत ने कहा कि राज्य और उसके नियामक निकायों के लिए एक ऐसा तंत्र बनाना चाहिए, जिसमें प्रोफेशनल कोर्स करने वाले छात्रों की फीस तय हो.

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