बीते कई साल से देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में विज्ञान वर्ग के स्टूडेंट्स का दबदबा कायम है. विज्ञान वर्ग के स्टूडेंट्स न केवल आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसी टॉप रैंक वाली सेवाओं पर कब्जा जमाने में कामयाब रहे हैं बल्कि टॉपर्स में भी साइंस वाले स्टूडेंट्स की संख्या ज्यादा रही है.

हाल ही में संसद में बीजेपी सांसद सुशील मोदी के एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि साल 2017 से 2021 के बीच भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में कामयाब होने वाले प्रतिभागियों में 63.6 फीसद से ज्यादा उम्मीदवार इंजीनियर हैं. इन उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी के लिए लीक से हटकर पंरपरागत मानविक विषयों जैसे समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, पब्लिक एडमिनिस्टेशन को छोड़कर अपने मूल विषयों पर विश्वास जताया और कामयाबी पाई.

महिलाएं भी आगे

वहीं, महिलाओं ने भी सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी की नई कहानी लिखी है. 2017 से 2021 के बीच कामयाब होने वाली महिलाओं का आंकड़ा 24 फीसद से बढ़कर 28 फीसद तक जा पहुंचा है. इस बीच कुल 4371 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी. इनमें से 76 फीसद से अधिक विज्ञान वर्ग से थे. केवल 23.6 फीसद ने ही मानविकी के विषय लिए. हालांकि वैकल्पिक विषय के रूप में मानविकी के विषय ज्यादा पसंद किए गए. 650 से ज्यादा सफल प्रतिभागियों ने राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना, वहीं 577 ने समाजशास्त्र और 514 ने भूगोल विषय को विकल्प के रूप में चुना. बता दें कि हर साल लाखों उम्मीदवार सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी करते हैं और परीक्षा में बैठते हैं. 

क्या कहते हैं आंकड़े

कोर्स के अनुसार सफलता दर  

    वर्ष     अभियांत्रिकी   चिकित्सा    विज्ञान  मानविकी   चयनित उम्मीदवार
201769959682301056
20185094856199812
20195825661223922
20205413366193833
20214524464188748

जेंडर के अनुसार सफलता दर 

   वर्ष    पुरुष महिला कुल 
2017802 (75.95%)254 (24.05%)1056
2018619 (76.23%)193 (23.77%)812
2019702 (76.14%)220 (23.86%)922
2020595 (71.43%)238 (28.57%)833
2021547 (73.13%)201 (26.87%)748

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