केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम OSM को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद छात्र संगठन NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस सिस्टम में कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ियां हुई हैं, जिनका सीधा असर लाखों छात्रों के रिजल्ट पर पड़ा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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OSM सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

याचिका में कहा गया है कि CBSE ने इस साल पहली बार आंसर शीट की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था. लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद देशभर से छात्रों ने शिकायतें दर्ज कराईं कि उनकी आंसर शीट में कई तरह की गड़बड़ियां हैं.इनमें धुंधली स्कैन कॉपी, कुछ पन्नों का गायब होना, अधूरी अपलोडिंग और उत्तरों के गलत मिलान जैसी समस्याएं शामिल हैं. छात्रों का कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से उनके अंक प्रभावित हुए हैं.

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NSUI का दावा लाखों छात्रों का भरोसा टूटा

NSUI ने कोर्ट में दलील दी है कि रिजल्ट आने के तुरंत बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन की गई आंसर शीट की कॉपी मांगी. संगठन का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य शिकायत नहीं है, बल्कि पूरे मूल्यांकन सिस्टम पर छात्रों के भरोसे में बड़ी गिरावट को दर्शाता है. NSUI ने यह भी कहा कि मौजूदा शिकायत निवारण प्रक्रिया कमजोर है और छात्रों को अपनी आंसर शीट की फिजिकल जांच या स्वतंत्र री-चेकिंग का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है.

CBSE की आपत्ति और जवाब

सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से याचिका पर आपत्ति जताई गई.बोर्ड के वकील ने कहा कि NSUI एक राजनीतिक संगठन से जुड़ा छात्र समूह है और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. CBSE का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को पोर्टल के जरिए हल किया जा रहा है और इसे अनिश्चित समय तक खुला नहीं रखा जा सकता. बोर्ड ने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम को पारदर्शिता और तेजी के लिए लागू किया गया है. यह भी पढ़ें - IIT पैनल की हरी झंडी के बाद CBSE का नया री-इवैल्यूएशन पोर्टल तैयार, छात्रों को मिलेगा सुरक्षित सिस्टम

NSUI की प्रमुख मांगें

याचिका में NSUI ने कई अहम मांगें रखी हैं, इनमें आंसर शीट सत्यापन पोर्टल को कम से कम एक महीने के लिए दोबारा खोलना शामिल है.साथ ही जिन मामलों में विवाद है, उनमें मैनुअल री-चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन की अनुमति देने की मांग की गई है. संगठन ने केंद्र सरकार की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने और भविष्य में डिजिटल मूल्यांकन के लिए स्पष्ट नियम बनाने की भी अपील की है.

छात्रों के भविष्य पर चिंतायाचिका में यह भी कहा गया है कि परीक्षा परिणामों में देरी या गलतियों का सीधा असर छात्रों के एडमिशन पर पड़ता है. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया समय पर चलती रहती है, और बाद में अंक सुधार होने पर छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए इस पूरे मामले की गंभीर जांच जरूरी है.

हाईकोर्ट में अगली सुनवाईदिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है.अब इस केस की अगली सुनवाई 12 जून को होगी. इस सुनवाई में यह तय हो सकता है कि OSM सिस्टम की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं और छात्रों की मांगों पर कोर्ट क्या रुख अपनाता है.

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