बिहार में स्कूलों और कॉलेजों की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए सरकार दो योजनाओं पर काम कर रही है. इसके तहत सरकारी स्कूलों के चुने हुए शिक्षकों को विदेश भेजकर वहां पढ़ाने के तरीके समझने का मौका दिया जाएगा. वहीं, राज्य के नए सहायक प्रोफेसरों में से 100 को विदेश के बड़े शिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग के लिए चुना जाएगा. हालांकि, स्कूल शिक्षकों के चयन के नियम अभी तय होने बाकी हैं.
सरकारी स्कूलों के किन शिक्षकों को मिलेगा मौका?
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षकों को चुने जाने की तैयारी है, जो पढ़ाई के साथ स्कूल की दूसरी गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं. चयन में शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, स्कूल में उनके काम और नए तरीके से पढ़ाने की कोशिशों को महत्व दिया जाएगा. शिक्षक अपने आवेदन जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी DEO के माध्यम से दे सकेंगे.
विदेश जाकर क्या सीखेंगे स्कूल के शिक्षक?
चुने गए शिक्षक विदेश के स्कूलों में जाकर वहां पढ़ाई के तरीके समझेंगे. वे देखेंगे कि बच्चों को किस तरह पढ़ाया जाता है, पढ़ाई में नई तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है और बच्चों के होमवर्क की जांच किस तरह की जाती है. इसके अलावा शिक्षक यह भी जानेंगे कि स्कूलों में बच्चों की दूसरी गतिविधियां कैसे होती हैं और माता-पिता के साथ शिक्षकों का तालमेल कैसे रखा जाता है. विदेश से लौटने के बाद शिक्षकों को अपने अनुभव और सीख की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को देनी होगी.
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छठ के बाद तय होंगे चयन के नियम
स्कूल शिक्षकों को विदेश भेजने के लिए शिक्षा विभाग चयन के नियम तैयार करेगा. छठ पर्व के बाद इन नियमों तय होंगे. इसके बाद यह भी तय होगा कि शिक्षकों का चयन किस आधार पर होगा और उन्हें किन देशों में भेजा जाएगा. फिलहाल विदेश जाने वाले स्कूल शिक्षकों की अंतिम सूची या देशों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं. इसलिए इच्छुक शिक्षकों को शिक्षा विभाग की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा.
100 नए सहायक प्रोफेसरों को भी मिल सकती है ट्रेनिंग
बिहार सरकार ने कॉलेजों में पढ़ाने वाले नए सहायक प्रोफेसरों के लिए भी विदेश में ट्रेनिंग की योजना की घोषणा की है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 2,451 नवनियुक्त सहायक प्रोफेसरों के कार्यक्रम में बताया था कि इनमें से 100 को ऑक्सफोर्ड और दूसरे बड़े अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा. इस योजना का उद्देश्य प्रोफेसरों को पढ़ाने के नए तरीकों से परिचित कराना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है. इस प्रशिक्षण का खर्च राज्य सरकार उठाएगी.
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