बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 को लेकर शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पूरी तैयारी कर ली है. इस बार परीक्षा को पूरी तरह नकल-मुक्त, अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं. बोर्ड ने सभी जिलों के प्रशासन और परीक्षा केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. खास तौर पर समय को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है, ताकि परीक्षा की गरिमा बनी रहे और सभी छात्रों के लिए एक समान माहौल मिल सके.

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बिहार बोर्ड ने साफ शब्दों में कहा है कि परीक्षा के दिन समय का पालन हर परीक्षार्थी के लिए जरूरी होगा. सभी छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले अपने-अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा. यह समय इसलिए रखा गया है ताकि छात्रों की सही तरीके से जांच हो सके और वे बिना घबराहट के परीक्षा हॉल तक पहुंच सकें. बोर्ड का कहना है कि समय पर पहुंचने से परीक्षा प्रक्रिया भी सुचारु रूप से चलती है.

30 मिनट पहले बंद होगा मुख्य गेट

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परीक्षा शुरू होने से ठीक 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्र का मुख्य गेट बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद किसी भी छात्र को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वह किसी भी वजह से देर से क्यों न पहुंचा हो. बोर्ड ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि परीक्षा शुरू होते समय किसी तरह का हंगामा या अव्यवस्था न हो और अंदर बैठे छात्रों की एकाग्रता भंग न हो.

देर से आने पर नहीं मिलेगी कोई छूट

बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि देर से आने वाले छात्रों को किसी भी हाल में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा. चाहे ट्रैफिक जाम हो, साधन न मिला हो या कोई निजी कारण हो, इन सबको मान्य नहीं माना जाएगा. परीक्षा के नियम सभी के लिए समान होंगे. बोर्ड का मानना है कि नियमों में ढील देने से अनुशासन टूटता है और इसका असर ईमानदार छात्रों पर पड़ता है.

जबरन प्रवेश करना माना जाएगा अपराध

यदि कोई परीक्षार्थी गेट बंद होने के बाद दीवार फांदकर, गेट पर जबरदस्ती करके या किसी भी गलत तरीके से परीक्षा केंद्र में घुसने की कोशिश करता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा. बोर्ड ने कहा है कि इस तरह की हरकतें परीक्षा की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाती हैं. ऐसे मामलों में तुरंत प्रशासन को सूचना दी जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.

छात्रों पर होगी सख्त कार्रवाई

यदि कोई छात्र जबरन परीक्षा केंद्र में प्रवेश करता हुआ पकड़ा जाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी. ऐसे छात्र को अगले दो वर्षों तक बिहार बोर्ड की किसी भी परीक्षा में बैठने से रोक दिया जाएगा. इसके साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी. बोर्ड का कहना है कि इस तरह की सख्ती जरूरी है ताकि बाकी छात्रों को गलत संदेश न जाए.

केंद्र अधिकारियों की भी जवाबदेही तय

बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी. यदि किसी केंद्र पर नियमों के बावजूद किसी छात्र को अंदर प्रवेश दिया गया या उसे परीक्षा में बैठने दिया गया, तो उस केंद्र के केंद्राधीक्षक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बोर्ड ने सभी केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे नियमों का पूरी तरह पालन करें.

नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम

इस बार परीक्षा को नकल-मुक्त बनाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं. परीक्षा केंद्रों के आसपास सख्त निगरानी रखी जाएगी. मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और किसी भी तरह की प्रतिबंधित सामग्री पर पूरी तरह रोक रहेगी. प्रवेश से पहले छात्रों की अच्छे से जांच की जाएगी ताकि कोई भी अनुचित सामग्री अंदर न ले जा सके.

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