ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने छात्र वीजा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए भारत को अब “उच्चतम जोखिम” यानी असेसमेंट लेवल-3 (AL3) की श्रेणी में डाल दिया है. इस फैसले के बाद भारतीय छात्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का रास्ता पहले से ज्यादा कठिन हो गया है. अब तक भारत असेसमेंट लेवल-2 (AL2) की श्रेणी में था, जहां वीजा प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान मानी जाती थी. लेकिन नए फैसले के तहत भारत को सीधे AL3 में डाल दिया गया है. इसका साफ मतलब है कि अब भारतीय छात्रों के वीजा आवेदनों की जांच और ज्यादा सख्ती से की जाएगी. दस्तावेजों की संख्या बढ़ेगी और हर जानकारी की गहराई से जांच होगी. ऑस्ट्रेलिया सरकार का यह कदम हाल के समय में सामने आए फर्जी डिग्री और वीजा धोखाधड़ी के मामलों के बाद उठाया गया है. भारत में बड़े पैमाने पर फर्जी कॉलेज, नकली सर्टिफिकेट और गलत दस्तावेजों के जरिए विदेश जाने के कई मामले उजागर हुए हैं. इन्हीं कारणों को आधार बनाकर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को “हाई रिस्क” देशों की सूची में डाल दिया है. गौर करने वाली बात यह है कि भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देशों में से एक है. हर साल लगभग 1 लाख 40 हजार भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में दाखिला लेते हैं. कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या करीब 6 लाख 50 हजार है, जिनमें भारतीय छात्रों की भागीदारी काफी बड़ी है. इसके बावजूद भारत को उच्च जोखिम की श्रेणी में रखना कई सवाल खड़े करता है. इस दिन से लागू हुए नियम नए नियम 8 जनवरी 2026 से लागू कर दिए गए हैं. इन नियमों के तहत अब भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई और पैसों से जुड़े दस्तावेज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत तरीके से पेश करने होंगे. सिर्फ बैंक स्टेटमेंट देना काफी नहीं होगा, बल्कि यह भी साबित करना होगा कि पैसा कहां से आया है और पढ़ाई के पूरे खर्च को वहन करने की क्षमता है. इसके साथ ही शैक्षणिक दस्तावेजों की भी कड़ी जांच की जाएगी. डिग्री, मार्कशीट और अन्य सर्टिफिकेट का सत्यापन अब सीधे संबंधित संस्थानों से किया जाएगा. यानी अगर किसी भी दस्तावेज में गड़बड़ी पाई गई, तो वीजा आवेदन सीधे खारिज किया जा सकता है. इससे ईमानदार छात्रों को भी लंबी प्रक्रिया और ज्यादा इंतजार का सामना करना पड़ सकता है. ये देश भी हाई रिस्क श्रेणी में भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश और भूटान को भी “हाई रिस्क” देशों की श्रेणी में रखा गया है. इससे साफ है कि दक्षिण एशियाई देशों से आने वाले छात्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना अब पहले जैसा आसान नहीं रहेगा. इन देशों के छात्रों को ज्यादा दस्तावेज देने होंगे और वीजा प्रक्रिया में ज्यादा समय लग सकता है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह बदलाव कुछ समय के लिए है या फिर लंबे समय तक लागू रहेगा. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सख्ती लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा सेक्टर पर भी पड़ सकता है. क्योंकि बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र ही वहां की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की आय का अहम हिस्सा होते हैं. ऑस्ट्रेलिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मंत्री जूलियन हिल ने माना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच ऑस्ट्रेलिया की पसंद अब पहले जैसी नहीं रही. उन्होंने कहा कि “बिग 4” देशों में ऑस्ट्रेलिया अब सबसे कम पसंद किया जाने वाला देश बनता जा रहा है. इन चार देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.

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