पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने एक नई फैलोशिप स्कीम शुरू की है. इसका मकसद सिर्फ रिसर्च को थीसिस या एकेडमिक पेपर तक सीमित रखना नहीं, बल्कि रिसर्च को ऐसे प्रोडक्ट, तकनीक, स्टार्टअप और समाधान में बदलने पर जोर देना है, जिनका इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं को हल करने में किया जा सके.  AICTE  इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डॉक्टोरल फैलोशिप प्रोग्राम (AIEDPF) के तहत 150 पीएचडी फैलोशिप दी जाएगी. इस प्रोग्राम के लिए 5 साल में 245 करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च का अनुमान लगाया गया है. 

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 AICTE ने रिसर्च को लैब से बाहर ले जाने पर दिया जोर 

AIEDPF के रिसर्चर्स को ऐसी रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिसका संबंध वास्तविक समस्याओं से हो. यानी रिसर्च का उद्देश्य केवल थीसिस पूरी करने या एकेडमिक पब्लिकेशन तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि उसके व्यावहारिक रिजल्ट पर भी ध्यान दिया जाएगा. इस योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसे नई तकनीकी, प्रोटोटाइप, बौद्धिक संपदा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कमर्शियल प्रोडक्ट या बिजनेस शुरू करने की संभावना हो. AICTE का फोकस इस बात पर है कि किसी रिसर्च का रिजल्ट, यूनिवर्सिटी या लैब से निकालकर समाज और उद्योग तक पहुंचा सके. 

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टेक्नोलॉजी के साथ नॉन टेक्निकल रिसर्च को भी जगह 

AIEDPF में इनोवेशन को सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा गया. प्रोग्राम के तहत टेक्नोलॉजी से रिसर्च जुड़े रिसर्च के साथ नॉन टेक्निकल इनोवेशन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा. AICTE मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि रिसर्चर्स अलग-अलग क्षेत्र को जोड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों पर काम कर सके.

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पहले 3 साल हर महीने मिलेंगे 60 रुपये 

AIEDPF के तहत चयनित रिसर्चर को अधिकतम 5 साल तक वित्तीय सहायता मिल सकती है. यह सहायता पात्रता शर्तों और अकेडमिक व रिसर्च प्रोग्राम के ऊपर निर्भर होगी. फेलोशिप के तहत पहले 3 सालों के लिए हर महीने 60 रुपये और लागू एचआरए दिया जाएगा. इसके बाद चौथे और पांचवें साल में फेलोशिप की राशि बढ़ाकर 70,000 रुपये प्रतिमाह और लागू एचआरए हो जाएगी. 

हर स्कॉलर को 10 लाख रुपये तक इनोवेशन ग्रांट 

फेलोशिप के अलावा हर एक रिसर्चर को 10 लाख रुपये तक का इनोवेशन ग्रांट भी मिल सकता है. इस राशि का इस्तेमाल रिसर्च आइडिया को आगे बढ़ाने और उसे व्यावहारिक समाधान में बदलने से जुड़े कामों के लिए किया जा सकेगा. इसमें प्रोटोटाइप तैयार करना, उसकी टेस्टिंग और वैलिडेशन, फील्ड ट्रायल, डेटा कलेक्शन, यात्रा और दूसरे जरूरी रिसर्च एक्टिविटी शामिल है. इस एक्स्ट्रा फंडिंग का उद्देश्य ऐसे रिसर्च को आगे बढ़ाना है, जो शुरुआती स्तर पर सफल हो, लेकिन उसे वास्तविक प्रयोग तक ले जाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत हो.

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