मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 स्थित वीआईपी गेट के पास ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए बनाए गए नमाज शेड को हटाए जाने के मामले में गुरुवार (5 मार्च) को बॉम्बे हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई. अदालत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि एयरपोर्ट परिसर में किसी भी तरह का प्रार्थना शेड बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

सुनवाई के दौरान मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि एयरपोर्ट परिसर के आसपास कम से कम तीन मस्जिदें मौजूद हैं. जहां ड्राइवर 5 से 10 मिनट में पहुंचकर नमाज अदा कर सकते हैं. MMRDA ने यह भी बताया कि संबंधित शेड को पहले ही हटा दिया गया है और एयरपोर्ट पर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं. हाल ही में एयरपोर्ट परिसर में ड्रोन देखे जाने की घटना का भी हवाला दिया गया.

सुरक्षा कारणों से नहीं दी जा सकती है शेड को परमिशन- अदालत

एमएमआरडीए ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता के खिलाफ 26 मामले दर्ज हैं और जिस स्थान पर नमाज शेड था. वहां सुरक्षा के अलावा निर्माण कार्य भी चल रहा है. ऐसे में वहां किसी भी तरह का ढांचा बनाना जोखिम भरा है और अस्थायी व्यवस्था के लिए भी जगह उपलब्ध नहीं है. MMRDA की तरफ से बंद लिफाफे में सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे शेड को परमिशन देने में क्या दिक्कतें हैं वह अदालत में सौंपी गई. अदालत में उसे पढ़ा और उसके बाद कहा सुरक्षा कारणों की वजह से ऐसे शेड को परमिशन नहीं दी जा सकती है.

मंदिर के खिलाफ दायर होगी याचिका तो उसपर भी होगा विचार- अदालत

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आसपास मस्जिद नहीं बल्कि मदरसा है, जो धार्मिक शिक्षा के लिए है. इस पर अदालत ने पूछा कि क्या वहां नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, जिस पर याचिकाकर्ता ने माना कि नमाज पढ़ी जा सकती है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पास में एक मंदिर भी है और 1995 से वहां प्रार्थना शेड मौजूद था, जिसे अप्रैल 2025 में तोड़ दिया गया.

इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगर वहां मंदिर भी है तो ‘टू रॉन्ग्स डोंट मेक ए राइट’. अदालत ने कहा कि अगर किसी मंदिर के खिलाफ याचिका दायर होती है तो उस पर भी कानून के अनुसार विचार किया जाएगा.

एयरपोर्ट पर नहीं दी जा सकती है प्रार्थना स्थल की अनुमति- बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एयरपोर्ट बेहद संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र है, जहां हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं और वीवीआईपी मूवमेंट भी होता है. ऐसे में वहां किसी भी धर्म के लिए प्रार्थना स्थल की अनुमति नहीं दी जा सकती है. अदालत ने यह भी कहा कि भले ही एक किलोमीटर के दायरे में मस्जिद न हो, तब भी एयरपोर्ट परिसर में प्रार्थना शेड बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

याचिकाकर्ता ने रमजान के दौरान की अस्थायी व्यवस्था की मांग

अदालत ने यह भी बताया कि MMRDA ने सात संभावित स्थानों की पहचान की थी, लेकिन 7 अलग-अलग एजेंसियों ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और एयरपोर्ट विकास परियोजनाओं को देखते हुए वहां किसी भी तरह की अनुमति देने से इनकार कर दिया. याचिकाकर्ता ने रमजान के दौरान अस्थायी व्यवस्था की मांग की और कहा कि इफ्तार का समय करीब 7 बजे होता है, ऐसे में कई ड्राइवरों को घर जाकर 8 बजे रोजा खोलना पड़ता है. इस पर अदालत ने कहा कि थोड़ी असुविधा सहन की जा सकती है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में स्थायी नमाज शेड बनाने की मांग भी की गई थी, लेकिन अदालत इस तरह का कोई आदेश नहीं दे सकती. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया. हालांकि अदालत ने यह छूट दी कि जब नया एयरपोर्ट बन जाए, तब याचिकाकर्ता एयरपोर्ट अथॉरिटी के सामने नमाज के लिए जगह की मांग को लेकर प्रतिनिधित्व दे सकते हैं. इस पर अंतिम निर्णय एयरपोर्ट प्राधिकरण ही करेगा.

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