Crude Oil Prices: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ईरान के आसपास बने तनावपूर्ण हालात का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. जिसके कारण चिंता का माहौल बनता दिख रहा है.

आमतौर पर जब क्रूड ऑयल के दाम इस तरह तेजी से बढ़ते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है. तेल महंगा होन के कारण इसका असर दूसरे कई पहलूओं पर होता है. रोजमर्रा की वस्तुओं के महंगे होने का डर सताने लगता है. क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का खतरा भी मंडरा रहा है. आइए जानते हैं, इस बारे में... 

कीमतों में आई जोरदार तेजी 

ताजा आंकड़ों से साफ पता चलता है कि, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही है. अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में करीब 28 फीसदी का उछाल आया है और यह लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है.

वहीं ब्रेंट क्रूड में भी 26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. इसकी कीमत करीब 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. बाजार जानकारों का कहना है कि, अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द शुरू नहीं होता है तो, यह संकट बहुत बड़ा रूप ले सकती है. जिससे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है. 

उत्पादन पर भी पड़ा असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब तेल उत्पादन पर भी दिखने लगा है. सुरक्षा कारणों से कुवैत ने अपने तेल उत्पादन और रिफाइनरी गतिविधियों में कटौती की है. वहीं इराक के उत्पादन में करीब 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

इराक के दक्षिणी तेल क्षेत्रों में उत्पादन युद्ध से पहले के 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर करीब 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है. इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी दबाव को देखते हुए अपने ऑफशोर उत्पादन को सावधानी के साथ चलाने का फैसला लिया है.

2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर पहुंचा कच्चा तेल

अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 30 जून 2022 को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचकर 105.76 डॉलर पर पहुंच गई थी. वहीं, ब्रेंट क्रूड ने 29 जून 2022 को 104 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को छूआ था. यानी कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी 4 साल बाद देखने को मिल रही है.

इन सेक्टरों पर दिख सकता है असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर कई सेक्टरों पर पड़ सकता है. खासकर उन सेक्टरों पर जिनकी लागत सीधे तौर पर ऊर्जा या क्रूड से जुड़ी होती है. इसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, पेंट इंडस्ट्री, एविएशन सेक्टर, लुब्रिकेंट कंपनियां, टायर इंडस्ट्री और सीमेंट सेक्टर प्रमुख रूप से शामिल हैं.

तेल महंगा होने पर इन सेक्टरों की कंपनियों का उत्पादन और संचालन लागत बढ़ जाती है. जिससे कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है.

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