Wipro Q3 Results: सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो का वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर–दिसंबर तिमाही (Q3) में एकीकृत शुद्ध लाभ सात प्रतिशत घटकर 3,119 करोड़ रुपये रह गया. कंपनी ने बताया कि यह गिरावट मुख्य रूप से नई श्रम संहिता लागू होने के कारण किए गए 302.8 करोड़ रुपये के एकमुश्त अस्थायी प्रावधान की वजह से हुई है.
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 3,353.8 करोड़ रुपये रहा था.
राजस्व में मजबूती, मुनाफे पर दबाव
विप्रो के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी की परिचालन आय 5.5 प्रतिशत बढ़कर 23,555.8 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 22,318.8 करोड़ रुपये थी.
तिमाही आधार पर शुद्ध लाभ में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आयी है जबकि राजस्व में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि लागत से जुड़े दबावों के बावजूद कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन में राजस्व स्तर पर मजबूती बनी हुई है.
एआई रणनीति पर फोकस
विप्रो के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक श्रीनि पल्लिया ने कहा कि तीसरी तिमाही में हमने अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यापक वृद्धि दर्ज की. जैसे-जैसे कृत्रिम मेधा (AI) एक रणनीतिक अनिवार्यता बनती जा रही है, ‘विप्रो इंटेलिजेंस’ एक विशिष्ट भूमिका निभा रहा है.
उन्होंने बताया कि कंपनी ने एआई-सक्षम प्लेटफॉर्म और समाधानों को और मजबूत किया. ‘विंग्स’ और ‘वेगा’ के जरिए एआई-आधारित सेवाओं का विस्तार किया. वैश्विक स्तर पर नवाचार नेटवर्क को और बढ़ाया. पूरी आईटी इंडस्ट्री पर दिखा श्रम संहिता का असर दिखा. नई श्रम संहिता का प्रभाव केवल विप्रो तक सीमित नहीं रहा.
इसके अन्य बड़े प्रतिद्वंद्वियों के तिमाही नतीजों पर भी इसका असर साफ दिखा-
- टीसीएस: Q3 में 2,128 करोड़ रुपये का असर
- इन्फोसिस: 1,289 करोड़ रुपये का नुकसान
- एचसीएलटेक: 8.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 719 करोड़ रुपये) का एकमुश्त प्रावधान
नई श्रम संहिता के कारण आईटी कंपनियों के मुनाफे पर अल्पकालिक दबाव जरूर दिख रहा है, लेकिन राजस्व वृद्धि और एआई-केंद्रित रणनीतियाँ इस सेक्टर की दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाती हैं. आने वाली तिमाहियों में लागत स्थिरीकरण के साथ मुनाफे में सुधार की उम्मीद की जा सकती है.
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