Real Estate News: आपने भी कई ऐसे हाउसिंग कॉम्प्लेस देखे होंगे, जहां पार्क से लेकर पार्किंग तक की सारी फेसिलिटीज मौजूद हैं. बावजूद इसके वहां रहने के लिए कोई तैयार नहीं है. . रियल एस्टेट सेक्टर में इन्हें 'Ghost Properties' कहा जाता है. ऐसे घर सालों साल खाली पड़े रह जाते हैं, जबकि ये खरीदने के लिए बिल्कुल तैयार होते हैं. भारत के हाउसिंग मार्केट में यह सिलसिला अब बढ़ता जा रहा है.
देश में करोड़ों की आबादी है और लोगों को किफायती घरों की तलाश है, लेकिन डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम है. फिर भी दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे जैसे कई बड़े शहरों में लाखों बने-बनाए फ्लैट्स खाली पड़े हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में इनमें भूतों का बसेरा है या बात कुछ और है?
घराें के घोस्ट फ्लैट्स बनने कारण
कई बार कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स दूर-दराज के इलाकों में बने होते हैं, जहां सड़क, पानी, बिजली, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी होती है. ऐसे में लोग वहां शिफ्ट होने से कतराते हैं और घर खाली पड़े रह जाते हैं.
निवेश का भी है जरिया
कुछ घर इन्वेस्टमेंट के तौर पर खरीदे जाते हैं. मकान मालिक उनमें रहने या उन्हें किराए पर देने के बजाय प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों से फायदा उठाने की उम्मीद में ज्यों का त्यों रख देते हैं. भारत में किराएदारों के लिए बने सख्त कानूनों की वजह से भी मकान मालिकों को डर लगा रहता है कि कहीं उनके घर पर किराएदार कब्जा न कर लें. ऐसे में वे फ्लैट्स को खाली रखना ही ज्यादा सुरक्षित समझते हैं.
मांग के अनुरूप सप्लाई न होना
बिल्डर्स कई बार ज्यादा मुनाफे के चक्कर में लग्जरी और प्रीमियम फ्लैट्स ज्यादा बनाते हैं, जबकि भारत में असली जरूरत 'अफोर्डेबल हाउसिंग' की है. गरीब और मध्यम वर्ग इन फ्लैटों को नहीं खरीद पा रहे हैं. वहीं, कई प्रोजेक्ट्स आधी-अधूरी कानूनी प्रक्रियाओं के चलते बीच में फंसी रह जाती हैं.
कई प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जिसके लिए लोगों ने पैसे तो दे दिए हैं, लेकिन बिल्डर के दिवालिया होने या कानूनी विवादों के कारण पजेशन या 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' नहीं मिल पाता है. बिना ओसी के वहां रहने अवैध हो जाता है. इस तरह के कई कारण हैं कि बने-बनाए सुंदर फ्लैट्स भी खाली पड़े रह जाते हैं और ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं है, बल्कि चीन-स्पेन जैसे कई और देश इसका सामना कर रहे हैं.
ये भी पढ़ें:
भारत या पाकिस्तान: किस देश की सरकार फ्यूल पर सबसे ज्यादा वसूलती है टैक्स?
