एक्सप्लोरर

भारत में महंगा क्यों बिकता है iPhone, 1 लाख के फोन में कितना पैसा कंपनी को और कितना सरकार को जाता है?

जिस iPhone को लेने के लिए लोग ईएमआई तक लगा देते हैं, क्या उसका पूरा पैसा कंपनी के पास जाता है? सरकार iPhone का कितना हिस्सा अपने पास रखती है? आइए जानते हैं.

आईफोन खरीदने का सपना बहुत से लोगों का होता है. क्रेज तो ऐसा है कि भारत में लोग ईएमआई लगाकर आईफोन लेते हैं, क्योंकि ये काफी ज्यादा महंगा भी होता है. खासकर भारत में आईफोन की कीमत अमेरिका, दुबई से तो ज्यादा ही होती है. ऐसे में मन में ये सवाल जरूर आता है कि आखिर यहां आईफोन इतना महंगा क्यों बिकता है? क्या इसकी पूरी वजह सरकार का टैक्स है या एप्पल ही काफी बड़ा मार्जिन रखती है?

देखिए सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि भारत में बिकने वाला हर आईफोन पूरी तरह विदेश से तैयार होकर नहीं आता है. एप्पल ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग काफी बढ़ाई है. 2026 में तो दुनिया के करीब 26% आईफोन भारत में बनने की उम्मीद है. 

सरकार को कितना मिलता है?
अगर आप भारत में 1 लाख रुपए का आईफोन खरीदते हैं तो इस कीमत में जीएसटी शामिल होता है. एप्पल खुद अपनी वेबसाइट पर साफ बताता है कि उसके भारत में दिखाए गए आईफोन के दाम जीएसटी के साथ होते हैं और टैक्स बिल में अलग से दिखाया जाता है. आईफोन पर फिलहाल 18% जीएसटी लागू है. लेकिन 1 लाख रुपए पर सीधे 18000 रुपए रुपये जीएसटी नहीं निकलता, क्योंकि 1 लाख की कीमत पहले से जीएसटी के साथ ही है.

आप इसे ऐसे समझिए कि 1 लाख रुपए को 1.18 से भाग देंगे तो करीब 84746 रुपए हुए. इसका मतलब है कि टैक्स से पहले फोन की कीमत 84746 रुपए थी और इसमें करीब 15254 रुपए जीएसटी जोड़ा गया है. अब इस 15254 रुपए को सरकार का वो हिस्सा माना जा सकता है जो ग्राहक की अंतिम कीमत में जीएसटी के तौर पर शामिल है. वैसे ये जीएसटी भी सिर्फ केंद्र सरकार का पैसा नहीं है. इसमें केंद्र और राज्य सरकार के बीच सीजीएसटी/एसजीएसटी या आईजीएसटी बंटता है.

Meesho से शॉपिंग करते हैं तो सावधान, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया सख्त आदेश

84,746 रुपये कहां जाते हैं?
अब असली सवाल यही है कि टैक्स निकालने के बाद बचे हुए 84746 रुपए में एप्पल को कितना मिलता है? इस मामले में तो एक आंकड़ा बताना सही नहीं होगा. क्योंकि ये पूरी रकम एप्पल की भी कमाई नहीं है. इसमें फोन के पार्ट्स, असेंबली, कर्मचारियों की सैलरी और मैन्युफैक्चरिंग के खर्च, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, मार्केटिंग, रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन जैसे खर्चे शामिल होते हैं. इसके बाद जो पैसा बचता है उसमें एप्पल का ऑपरेटिंग प्रॉफिट शामिल होता है. इसलिए ये कहना कि 1 लाख में से 84746 रुपए सीधे एप्पल की जेब में जाता है, ये तो गलत होगा.

भारत में फोन महंगा क्यों है?
अब ये भी एक कंफ्यूजन ही है कि जब भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है तो फिर ये इतना ज्यादा महंगा क्यो बिक रहा है? असल में भारत में असेंबली होने का मतलब ये नहीं है कि फोन का हर पार्ट भारत में ही बनता है. एप्पल की सप्लाई चेन दुनियाभर में फैली हुई है. कंपनी के हजारों सप्लायर 60 से ज्यादा देशों में हैं और अलग-अलग कंपोनेंट्स मिलकर फोन को तैयार करते हैं.

मतलब कि भारत में फोन असेंबल होने के बावजूद सप्लाई चेन का तो खर्च होता ही है. इसके अलावा कुछ आईफोन मॉडल या उनके कंपोनेंट्स के आयात पर कस्टम ड्यूटी भी लग जाती है. बता दें कि भारत ने 2024 के बजट में ही मोबाइल फोन और कुछ कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 15% किया था. 

रूस से सीधे भारत तक बिछेगी पटरी, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल और विदेशी प्रोडक्ट्स?

हर देश में अलग कीमत क्यों?
सिर्फ टैक्स की वजह से ही आईफोन महंगा नहीं होता है. एप्पल की अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी है. एप्पल एक प्रीमियम ब्रांड है और अलग-अलग देशों में उसकी कीमत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग के खर्च के आधार पर नहीं फिक्स की जाती है. इसमें बाजार की हालत, करेंसी, डिस्ट्रीब्यूशन और कंपनी की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी भी शामिल होती है. यही वजह है कि एक ही मॉडल की कीमत अलग-अलग देशों में अलग हो जाती है.

अमेरिका में क्यों है सस्ता?
जब लोग कहते हैं कि अमेरिका में आईफोन सस्ता है, तो ये एक जरूरी अंतर समझना चाहिए. अमेरिका में एप्पल की वेबसाइट पर दिखाई जाने वाली कीमत सेल्स टैक्स हटाकर होती है, जबकि भारत में एप्पल की वेबसाइट पर दिखने वाली कीमत जीएसटी के साथ होती है. एप्पल ने खुद ये बताया है. भारत में एप्पल आईफोन 17, 82900 रुपए से शुरू होता है और आईफोन 17 Pro की शुरुआती कीमत 134900 रुपए है. इनमें जीएसटी शामिल है. इसलिए सिर्फ वेबसाइट पर दिखने वाली अमेरिकी और भारतीय कीमत को देखकर पूरा अंतर टैक्स के खाते में नहीं डाल देना चाहिए.

क्या Best before के बाद खाना जहर हो जाता है? FSSAI ने दूर किया कंफ्यूजन

About the author सृष्टि

'एबीपी नेटवर्क' में सीनियर कॉपी-एडिटर के तौर पर काम कर रहीं सृष्टि का डिजिटल मीडिया में 4 सालों से अधिक का अनुभव है.बिजनेस, एंटरटेनमेंट, धर्म, लाइफस्टाइल और यात्रा सेक्शन में लेखन, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है.सीसीएसयू से मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर चुकीं सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ की थी, जिसके बाद वो 2.5 साल तक टाइम्स नाउ नवभारत का हिस्सा भी रहीं.फाइनेंस के साथ फिल्मी कीड़ा होना न केवल इनका पेशा बल्कि हिस्सा है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Zomato पर खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा, कैश पेमेंट पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
Zomato पर खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा, कैश पेमेंट पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
फुल Fastag सिस्टम से देश को मिलेंगे 25000 करोड़, टोल बूथ पर नितिन गडकरी
फुल Fastag सिस्टम से देश को मिलेंगे 25000 करोड़, टोल बूथ पर नितिन गडकरी
इस राज्य में सस्ते होंगे फिल्मों के टिकट, हाई कोर्ट ने रद्द किया टैक्स
इस राज्य में सस्ते होंगे फिल्मों के टिकट, हाई कोर्ट ने रद्द किया टैक्स
अब इतने बजे तक चलेगा शेयर बाजार? SEBI ने रखा नया प्रस्ताव
अब इतने बजे तक चलेगा शेयर बाजार? SEBI ने रखा नया प्रस्ताव
Advertisement

वीडियोज

SANSANI: प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टल की 'बैड वार्डन' !। Crime News।UP। Gorakhpur
BRICS Summit 2026: PM Modi के 10 प्रस्तावों को मंजूरी.. पाक- अमेरिका के होश उड़ने वाले है !
Janhit : मोदी-जिनपिंग की मुलाकात का 'जनहित संदेश'| Brics Summit 2026 | PM Modi | Jinping | Delhi
Iran-America War News: एक पहाड़.. ईरान की बनेगा ढाल! | Pickaxe Mountain | Bunker-Buster Bombs
BRICS Summit 2026 : BRICS की 'त्रिशक्ति'..मोदी-पुतिन-शी | XI Jinping | Putin | PM Modi | Trump
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स ला रहा अपनी करेंसी? जानें क्या है सच्चाई
डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स ला रहा अपनी करेंसी? जानें क्या है सच्चाई
BRICS के प्रस्ताव से गदगद हुए सलमान खुर्शीद, 'कोई कारण नहीं दिखता कि...'
BRICS के प्रस्ताव से गदगद हुए सलमान खुर्शीद, 'कोई कारण नहीं दिखता कि...'
सहरसा: डॉक्टर या गुंडे? सदर अस्पताल में पत्रकार को पीटा, स्वास्थ्य विभाग चुप, VIDEO
सहरसा: डॉक्टर या गुंडे? सदर अस्पताल में पत्रकार को पीटा, स्वास्थ्य विभाग चुप, VIDEO
'मोदी जी को सलाम', BRICS समिट पर रवि शास्त्री का बड़ा बयान; जानें क्या कहा
'मोदी जी को सलाम', BRICS समिट पर रवि शास्त्री का बड़ा बयान; जानें क्या कहा
वीकेंड का वार: आम्रपाली ने मैरी कॉम को बताया 'बिग बॉस' तो रॉकस्टार बने काजी तौकीर
वीकेंड का वार: आम्रपाली ने मैरी कॉम को बताया 'बिग बॉस' तो रॉकस्टार बने काजी तौकीर
इंडियन सिनेमा की टॉप 9 मोस्ट प्रॉफिटेबल फिल्में, जिसने कमाया 1000% से ज्यादा प्रॉफिट
इंडियन सिनेमा की टॉप 9 मोस्ट प्रॉफिटेबल फिल्में, जिसने कमाया 1000% से ज्यादा प्रॉफिट
गाजा संकट पर ब्रिक्स सख्त, टू-स्टेट सॉल्यूशन और स्वतंत्र फिलिस्तीन का समर्थन
गाजा संकट पर ब्रिक्स सख्त, टू-स्टेट सॉल्यूशन और स्वतंत्र फिलिस्तीन का समर्थन
नंदीग्राम उपचुनाव: ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा बयान - 'अगर ममता बनर्जी...'
नंदीग्राम उपचुनाव: ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा बयान - 'अगर ममता बनर्जी...'
Embed widget