Investment Tips: पिछले दो सालों में भारत के अमीर निवेशकों यानी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाले का रुझान म्युचुअल फंड और रियल एस्टेट से हटकर वैकल्पिक निवेश कोष (AIF), विशेषकर SME-केंद्रित फंड्स की तरफ तेजी से बढ़ा है. इस खबर में आपको यह बताएंगे कि म्यूचुअल फंड के अलावा आप किन जगहों पर अपने पैसों को निवेश कर सकते हैं. 

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म्युचुअल फंड बनाम AIF की सीमाएं

दरअसल, म्युचुअल फंड ने खुदरा निवेशकों को अनुशासन देने का काम किया है. तो वहीं, दूसरी तरफ सेबी (SEBI) के नियमों की वजह से ही वे किसी एक बेहतरीन माइक्रो-कैप कंपनी में बड़ा दांव नहीं लगा सकते हैं. इतना ही नहीं, यह बड़े निवेशकों के लिए एक 'स्पीड लिमिटर' की तरह का काम करता है. हांलाकि, इसके विपरीत, कैटेगरी I और III AIF फंड प्रबंधकों को कम शेयरों, उच्च दृढ़ता और गहन शोध के साथ एक केंद्रित पोर्टफोलियो बनाने की अनुमति देते हैं. तो वहीं,  इसकी न्यूनतम निवेश सीमा 1 करोड़ रुपये है, जो इसे बेहद ही खास बनाता है. 

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यहां जानें SME क्षेत्र में छिपे अवसर के बारे में 

BSE SME और NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर 5 हजार से ज्यादा कंपनियां अपना काम करती हैं. जिन पर बड़े संस्थानों या फिर खुदरा निवेशकों की बड़ी नजर नहीं है. लेकिन, इनमें से कई कंपनियां रक्षा, स्पेशलिटी केमिकल्स और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में 25-40 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ इस साल अप्रैल के महीने में वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव में भी इन घरेलू कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है. 

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निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक

इस बदलाव से सीखने के लिए आपको 1 करोड़ रुपये की आवश्यकता नहीं है. जहां, बड़े निवेशक अब सर्वश्रेष्ठ SIP रिटर्न खोजने के बजाय यह देख रहे हैं कि वास्तविक अल्फा (Alpha) आखिर है कहां. इसके अलावा भारत का असली ग्रोथ इंजन निफ्टी 50 के बजाय 500 से 2 हजार करोड़ रुपये की ये उभरती हुई कंपनियां हो सकती हैं.