नई दिल्लीः आज पीएमसी बैंक के खाताधारकों के लिए आरबीआई ने राहत का एलान किया है और कहा है कि ग्राहक अपने खाते से 25 हजार रुपये तक निकाल सकते हैं जबकि पहले ये लिमिट 10 हजार रुपये तक थी. वहीं आरबीआई ने 24 सितंबर को जब सबसे पहले पीएमसी बैंक पर प्रतिबंध लगाए थे तो कहा था कि ग्राहक अपने खाते से 1000 रुपये तक ही निकाल सकते हैं. हालांकि इसके बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया कि सरकार 9 बैंकों को बंद करने जा रही है जिसके चलते आरबीआई और वित्त सचिव को हाल ही में सामने आकर कहना पड़ा कि ऐसा कुछ नहीं है और देश का बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है.

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हालांकि ऐसे में एक सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर कोई बैंक डूब जाता है या डिफॉल्ट करता है तो ऐसे में उस बैंक के खाताधारकों पर क्या असर पड़ेगा? क्या उनका पैसा पूरी तरह डूब जाएगा या बैंकिंग सिस्टम में कुछ इस तरह के प्रावधान हैं कि खाताधारकों की गाढ़ी मेहनत की कमाई बेकार नहीं जाएगी? इन सब सवालों के जवाब आपको यहां मिल पाएंगे.

बैंक डूबने की स्थिति में क्या होगा? -डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी (DICGC)की ओर से तय गए नियमों के अनुसार बैंकों में जमा पैसे पर ग्राहकों को 1 लाख रुपये तक की सेफ्टी की गारंटी मिलती है. यह शर्तें बैंक के सभी शाखाओं के लिए हैं और इसमें प्रिंसिपल अमाउंट और ब्याज दोनों ही शामिल होते हैं. यानी कि भले ही आपका जमा अमाउंट कितना ही हो अगर बैंक डूबता है तो आपके 1 लाख रुपये से ज्यादा की रकम सुरक्षित नहीं मानी जा सकती है.

बैंक में जमा हैं 5 लाख तो कितना मिलेगा अमाउंट अगर आपके बैंक खाते में 5 लाख रुपये जमा हैं अगर बैंक डिफॉल्ट करता है तो आपके 1 लाख रुपये तक मिलने की ही उम्मीद करें और बाकी रकम मिलने की आप उम्मीद कर भी सकते हैं और नहीं भी.

बैंक डूबने की स्थिति में कैसे मिल सकती है रकम बैंक डूबने की स्थिति में आपको किस तरह ये एक लाख रुपये तक की रकम मिल पाएगी. इसकी गाइडलाइंस डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी (DICGC) ने तय की हुई हैं और इनके मुताबिक ही वो पैसा आपको मिल पाएगा.

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बैंक डूबने की स्थिति का भारत में नहीं है इतिहास हालांकि भारत के इतिहास में ऐसे किसी बैंक का जिक्र नहीं मिलता जिसके डूबने की वजह से खाताधारकों का पैसा डूब गया हो. अगर किसी बैंक के डिफॉल्ट करने की स्थिति आती भी है तो भी उसे किसी अन्य बैंक में विलय कर दिया जाता है और उसके अकाउंट्स को बैंक में विलय कर लिया जाता है. बैंक के ग्राहकों को दूसरे बैंक में शिफ्ट कर लिया जाता है और सुनिश्चित किया जाता है कि खाताधारकों के हित किसी भी तरह से प्रभावित न हों.

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