Middle Class Money Mistakes: अक्सर मध्यम वर्ग के लोग सोचते हैं कि आर्थिक संकट अचानक आता है, लेकिन ऐसा नहीं है. दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे के अनुसार, यह धीरे-धीरे बनने वाली स्थिति होती है. जो रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियों से शुरू होती है.
ये गलतियां शुरुआत में मामूली लगती हैं, लेकिन समय के साथ इससे बड़ा नुकसान होने की संभावनाएं बनी रहती है. जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है. आइए जानते हैं, वॉरेन बफे की सलाह के विषय में...
क्रेडिट कार्ड का ब्याज बनता है बोझ
कई लोग बिना सोचे-समझे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका ऊंचा ब्याज धीरे-धीरे बड़ी परेशानी बन सकता है. वॉरेन बफे का कहना है कि 18 प्रतिशत या उससे ज्यादा ब्याज देना मतलब अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खोना है.
उनका मानना है कि सबसे पहले महंगे कर्ज को खत्म करना जरूरी है. जितनी जल्दी हो सके इस ब्याज के चक्कर से निकलना चाहिए. ऐसा करना आर्थिक स्थिति के लिए फायदेमंद होता है.
जल्दी अमीर बनने की सोच पड़ती है भारी
आजकल कई लोग कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह में जल्दबाजी कर बैठते हैं. लेकिन यही आदत आगे चलकर नुकसान का कारण बन सकती है. बफे का मानना है कि पैसे को बढ़ने के लिए समय देना जरूरी होता है. ठीक वैसे ही जैसे एक पेड़ को बड़ा होने में सालों लगते हैं.
वे बताते हैं कि अक्सर लोग पहले अपनी कमाई खर्च कर देते हैं और जो बचता है, उसे निवेश करते हैं. जबकि सही तरीका यह है कि सबसे पहले निवेश को प्राथमिकता दी जाए और बाकी पैसों को खर्च किया जाएं.
जरूरत से बड़ा घर बन सकता है आर्थिक बोझ
अक्सर लोग अपनी जरूरत से बड़ा घर लेने के लिए भारी लोन उठा लेते हैं, जो आगे चलकर उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव डालता है. बफे के मुताबिक, ऐसा करने से आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI चुकाने में चला जाता है.
जिससे बचत और निवेश के मौके कम हो जाते हैं. उनका मानना है कि घर रहने की जगह होनी चाहिए न कि दिखावे की.
किस्मत पर दांव लगाना
लोग जल्दी अमीर होने के लिए जुआ और लौटरी जैसी चीजों पर पैसे खर्च करने लगते है. हालांकि, इनमें लगने वाली छोटी- छोटी रकम भविष्य में बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है. इसलिए इन चीजों से दूरी बनाने की सलाह बफे देते हैं.
स्टेटस के लिए नई कार खरीदना
मध्यम वर्ग के लोग दिखावे के कारण नई कार लोन लेकर खरीद लेते हैं. इसके बाद बहुत लंबे समय तक ईएमआई के बोझ तले दबे रहते है. वहीं, कार धीरे-धीरे अपनी कीमत खोती जाती है.
वॉरेन बफे कई सालों तक पुरानी कार ही चलाते रहे हैं. उनका मानना है कि स्टेटस के चक्कर में नई कार लेना कोई समझदारी भरा कदम नहीं है.
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