US-China Trade War: अमेरिकी नागरिकों को पहनने पड़ेंगे पुराने कपड़े! डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने मचाई फैशन मार्केट में तबाही
US-China Trade War: अब तक अमेरिका में 800 डॉलर या उससे कम की कीमत के पार्सल पर कोई टैरिफ नहीं लगता था. इसे “de minimis exemption” कहा जाता है. लेकिन अब इस छूट को खत्म कर दिया गया.

US-China Trade War: डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति ने फास्ट फैशन इंडस्ट्री को हिला दिया है. अमेरिका अब चीन से आने वाले 800 डॉलर से कम के पार्सल पर टैक्स-फ्री छूट (De Minimis Exemption) खत्म कर रहा है, जिससे शीन, टेमू और अलीएक्सप्रेस जैसे चाइनीज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान होगा. 2 मई से इन पार्सल्स पर 120 फीसदी टैरिफ लगेगा, जिससे सस्ते कपड़ों और घरेलू सामानों की कीमतें बढ़ने वाली हैं.
क्या है नया नियम?
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक अमेरिका में 800 डॉलर या उससे कम की कीमत के पार्सल पर कोई आयात कर (टैरिफ) नहीं लगता था. इसे “de minimis exemption” कहा जाता है. इसी के चलते Shein, Temu, Aliexpress जैसे ब्रांड्स अमेरिका में बेहद सस्ते दामों पर कपड़े और अन्य उत्पाद बेचते रहे. लेकिन अब 2 मई से यह छूट खत्म कर दी गई है.
ट्रंप प्रशासन ने ऐलान किया है कि चीन से आने वाले पार्सल पर 120 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाएगा. 1 जून से यह शुल्क और बढ़कर 200 डॉलर प्रति पार्सल तक हो सकता है. साथ ही, चीन से आने वाले सभी उत्पादों पर कुल 145 फीसदी टैरिफ लागू किया जाएगा.
सेकेंडहैंड मार्केट को फायदा?
ऑनलाइन सेकेंडहैंड स्टोर थ्रेडअप को उम्मीद है कि महंगे होते फास्ट फैशन की वजह से लोग पुराने कपड़ों की तरफ रुख करेंगे. कंपनी का कहना है कि उन्होंने सालों से डी मिनिमिस छूट खत्म करने की मांग की थी, क्योंकि यह फास्ट फैशन को अनफेयर एडवांटेज देता था. थ्रेडअप के सर्वे के मुताबिक, 60 फीसदी अमेरिकी कहते हैं कि अगर कपड़े महंगे हुए तो वे सेकेंडहैंड मार्केट की तरफ रुख करेंगे.
लेकिन क्या टैरिफ से बदलेगी लोगों की आदत?
फास्ट फैशन ब्रांड्स जैसे H&M और यूनिक्लो ने अपना प्रोडक्शन वियतनाम, बांग्लादेश जैसे देशों में शिफ्ट कर लिया है, जहां अभी टैरिफ 90 दिन के लिए रोक दिए गए हैं.
क्या होगा आगे?
अगले कुछ महीनों में साफ होगा कि क्या टैरिफ वाकई में अमेरिकी कंज्यूमर्स की शॉपिंग आदतों को बदल पाएगा. फिलहाल, फास्ट फैशन का जादू अभी भी बरकरार है, लेकिन सेकेंडहैंड मार्केट को इससे बड़ा फायदा मिल सकता है.
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Source: IOCL





















