क्या आने वाले समय में यूपीआई से पेमेंट करना महंगा हो सकता है? इस सवाल पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि UPI जैसी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को हमेशा पूरी तरह मुफ्त नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि इसकी लागत किसी न किसी को उठानी ही पड़ती है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि अभी से आम लोगों से यूपीआई इस्तेमाल करने का फीस लिया जाएगा. 

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क्या है पूरा मामला?दरअसल, सरकार 2000 रुपये से अधिक की व्यापारियों को होने वाली यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये फीस 0.25% से 0.40% के बीच हो सकता है. हालांकि, ये केवल बिजनेस ट्रांजैक्शन पर लागू होगा. व्यक्ति से व्यक्ति को होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहने की संभावना है. 

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RBI गवर्नर ने क्या कहा?आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यूपीआई का नेटवर्क चलाने, उसे सुरक्षित रखने और लगातार बेहतर बनाने में खर्च आता है. ऐसे में यह व्यवस्था पूरी तरह मुफ्त नहीं रह सकती, क्योंकि इसकी लागत किसी न किसी को उठानी ही होगी. उनका इशारा इस ओर था कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए एक स्थायी व्यवस्था जरूरी है. 

क्या घबराने की जरूरत है?फिलहाल आम यूपीआई यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं है. अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि लोगों से UPI पेमेंट पर चार्ज लिया जाएगा. प्रस्तावित एमडीआर भी व्यापारियों को किए जाने वाले 2000 रुपये से अधिक के कुछ ट्रांजैक्शन तक सीमित हो सकता है. यानी रोजमर्रा के छोटे भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रह सकते हैं. 

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