Bureau of Indian Standards: सोने की आसमान छूती कीमतों के कारण भारतीय खरीदार अब तेजी से चांदी के गहनों और बर्तनों की ओर रुख कर रहे हैं. ग्राहकों के इस बदलते रुझान और चांदी की बढ़ती मांग को देखते हुए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) चांदी के गहनों की टेस्टिंग बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. बताया जा रहा है कि अगले दो सालों में चांदी के लिए रेफरल और एसे (जांच) लैबोरेटरी का दायरा पूरे देश में बढ़ाया जाएगा.
सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाली चांदी के गहनों के लिए 6-डिजिट का हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर अनिवार्य कर दिया गया है. इससे ग्राहक BIS Care App के जरिए चांदी की शुद्धता की लाइव जांच कर सकते हैं. अनिवार्य हॉलमार्किंग नियमों के तहत, असली चांदी पर BIS का लोगो, शुद्धता ग्रेड (जैसे 999, 925 स्टर्लिंग सिल्वर), एसेइंग सेंटर का कोड और जौहरी की पहचान का चिह्न भी होगा. अब मौजूदा जरूरतों को देखते हुए बड़े पैमाने पर चांदी के गहनों की टेस्टिंग शुरू करने की तैयारी है.
अब हाई-टेक होगी टेस्टिंग
चांदी की शुद्धता की जांच में तेजी लाने और छोटी-मोटी खामियों को दूर करने के लिए BIS अपने लैब्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स टेस्टिंग का सहारा ले रहा है. टेस्टिंग मशीनों को सीधे 'लैब इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम' (LIMS) से जोड़ा गया है, जिससे शुद्धता की रीडिंग अपने आप ही हो जाती है और हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं रहती है.
BIS का लगातार बढ़ता नेटवर्क
फिलहाल देशभर में BIS के पूरे 10 लैब्स हैं. इसे 1985 में शुरू की गई 'प्रयोगशाला मान्यता योजना' के तहत बनी मान्यता प्राप्त निजी और सरकारी प्रयोगशालाओं के एक बड़े नेटवर्क का भी सहयोग मिलता है. BIS की डिप्टी डायरेक्टर जनरल (लैबोरेटरीज) निशत एस हक ने कहा, "2014 में हमारे पास लगभग 147 मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं थीं और केवल 24 सरकारी प्रयोगशालाएं हमसे जुड़ी हुई थीं. आज हमारे पास 440 मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और 350 जुड़ी हुई प्रयोगशालाएं हैं.
ये भी पढ़ें:
सोना 7000 रुपया हुआ महंगा, चांदी की 14000 तक बढ़ी कीमत; क्यों सरपट भाग रहे रेट?
