भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है.

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इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत  

एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

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इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है.

साल दर साल आय में इजाफा

प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा.

इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.