Ram Mandir Donation: अयोध्या के राम मंदिर में हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दान पेटी में जमा होने वाले नोटों की गिनती कौन करता है? पैसे मंदिर से कैसे बाहर निकाले जाते हैं और इस पूरे काम पर किसकी नजर रहती है? हाल ही में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बाद ये सवाल फिर चर्चा में है. तो आइए जानते हैं राम मंदिर के चढ़ावे को संभालने का पूरा सिस्टम.

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कहां से आता है चढ़ावा?

रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं. बड़ी संख्या में लोग दान पेटियों में नकद राशि डालते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन और बैंक ट्रांसफर के जरिए भी मंदिर को दान मिलता है. मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, जिसकी गिनती और प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है.

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कौन गिनता है नोट?

राम मंदिर की दान पेटियों से निकली नकदी की गिनती स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI के कर्मचारियों की मौजूदगी में की जाती है. इसके लिए बैंक की टीम मंदिर परिसर में पहुंचती है और नोट गिनने वाली मशीनों की मदद से प्रोसेस पूरा करती है. गिनती के दौरान मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहते हैं.

दान पेटी से पैसा कैसे निकलता है?

दान पेटियों को खोलने का काम कोई एक आदमी नहीं करता है. इसके लिए पूरा प्रोसेस किया जाता है. ट्रस्ट के अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं. इसके बाद पैसों को सुरक्षित तरीके से गिनती केंद्र तक पहुंचाया जाता है. ये पूरा प्रोसेस CCTV कैमरों में रिकॉर्ड होता है और प्रशासनिक अधिकारियों भी इसकी देखरेख करते हैं.

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पैसे जमा कहां होते हैं?

गिनती पूरी होने के बाद नकदी को बैंक खाते में जमा करा दिया जाता है. मंदिर ट्रस्ट के अलग-अलग बैंक खाते हैं, जिनमें यह राशि जमा होती है. बाद में इसी पैसे का इस्तेमाल मंदिर के रखरखाव, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है.

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में सोशल मीडिया पर राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर कई तरह के दावे किए गए थे. इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने सामने आकर कहा कि दान की गिनती और जमा करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें बैंक तथा प्रशासन की निगरानी रहती है. ट्रस्ट का कहना है कि दान राशि का पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है और सारी प्रक्रिया नियमों के अनुसार होती हैं.